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तीर्थयात्रा में लापरवाही पड़ी IRCTC को भारी, अब देना होगा 30,000 का मुआवजा

IRCTC fined by Consumer Court Kerala: केरल के जिला उपभोक्ता आयोग ने धार्मिक यात्रा के दौरान बोर्डिंग पॉइंट बदलने और ट्रेन 17 घंटे लेट होने पर IRCTC को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। आयोग ने पीड़ित महिला यात्री को मानसिक परेशानी और अतिरिक्त खर्च के मुआवजे के रूप में 30,000 रुपए देने का आदेश दिया।
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IRCTC fined by Consumer Court Kerala

IRCTC ने की लापरवाही अब देना होगा 30,000 का मुआवजा, ( AI जनरेटेड फोटो )

IRCTC compensation 30000 rupees train delay: केरल के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए पीड़ित यात्री को 30 हजार रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। एक महिला यात्री ने आईआरसीटीसी की मनमानी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बोर्डिंग पॉइंट में अचानक हुए बदलाव के चलते उसकी धार्मिक यात्रा खराब हो गई।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पी.वी. जयराजन और सदस्य प्रीता जी. नायर एवं विजू वी.आर. ने माना कि सेवा में कमी के कारण शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी, भावनात्मक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। आदेश में कहा गया कि एक महीने के भीतर पीड़ित पक्ष को मानसिक परेशानी के लिए 30,000 रुपए का मुआवज़ा और अतिरिक्त खर्च के तौर पर 3000 रुपए का भुगतान किया जाए।

क्या है मामला?

शिकायतकर्ता ने IRCTC द्वारा आयोजित तीर्थयात्रा के लिए दो टिकट बुक किए थे। इसके तहत उत्तर प्रदेश में पुरी, काशी, अयोध्या और प्रयागराज संगम की यात्रा शामिल थी। शिकायत के अनुसार, टूर मूल रूप से 10 दिसंबर, 2022 को केरल के कोचुवेली रेलवे स्टेशन से शुरू होना था। लेकिन IRCTC ने बोर्डिंग पॉइंट बदलकर एर्नाकुलम कर दिया, जिससे उसे टेक्सी पर अतिरिक्त खर्चा करना पड़ा। इसके अलावा, ट्रेन लगभग 17 घंटे की देरी के बाद 11 दिसंबर को सुबह 2 बजे के आसपास रवाना हुई। इस देरी के कारण कई निर्धारित स्थलों पर नहीं जाया जा सका, साथ ही वहां बिताए जाने वाले समय में भी कटौती की गई। इससे उन्हें ठीक से पूजा अर्चना करने एवं धार्मिक रस्में निभाने का समय नहीं मिल पाया। साथ ही शिकायत में साफ-सफाई का अभाव, रहने की खराब व्यवस्था और सही जानकारी प्रदान न करने जैसे आरोप भी लगाए गए।

IRCTC ने दिया ये तर्क

IRCTC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव रेलवे के ऑपरेशनल कारणों से करना पड़ा और यात्रियों को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी। उसने कहा कि कोचुवेली और एर्नाकुलम के बीच की यात्रा के लिए रिफंड का ऑफर दिया गया था। साथ ही देरी को ध्यान में रखते हुए यात्रियों के खाने-पीने का इंतज़ाम किया गया था। आईआरसीटीसी ने कहा कि ये दिक्कतें रेलवे के ऑपरेशनल मुद्दों और चक्रवात से जुड़ी पाबंदियों की वजह से हुई थीं। हालांकि, IRCTC की दलीलों से जिला उपभोक्ता आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।

आयोग ने माना दोषी

आयोग ने IRCTC को सर्विस में कमी का दोषी पाया और शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने कहा की पीड़ित पक्ष की तरफ से दाखिल लिखित बयान से स्पष्ट है कि टूर के दौरान यात्रियों को काफी परेशानी हुई। इसलिए IRCTC को मुआवजे के तौर पर 30,000 रुपए और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए 3,000 रुपए देने का निर्देश दिया जाता है।