
Abhijeet Dipke: सोनम वांगचुक को हटाने पर सियासी संग्राम, CJP ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप (फोटो सोर्स: @abhijeet_dipke)
Sonam Wangchuk Hunger Strike: देश की राजधानी दिल्ली का सियासी और सामाजिक पारा इस समय सातवें आसमान पर है। NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं के हक में आवाज़ उठा रहे मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने के बाद विवाद बेहद गरमा गया है। इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को 'सरेआम अपहरण' करार दिया है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार ने वांगचुक को हटाकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ पिछले 20 से अधिक दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। वह इस पूरे आंदोलन का मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, इतने दिनों तक अन्न का एक दाना न लेने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी और उनका वजन लगभग 10 किलोग्राम तक कम हो गया था। शनिवार सुबह पुलिस ने अचानक कार्रवाई करते हुए उन्हें धरना स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, जिसे प्रदर्शनकारियों ने दमनकारी कदम बताया है।
सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने जैसी इस कार्रवाई पर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा, दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को किडनैप'करके बहुत बड़ी गलती कर दी है। आपकी इस तानाशाही ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का सैलाब ला दिया है। याद रखिए, अगर आपने हमें यहां रोकने की कोशिश की, तो आने वाले दिनों में देश का एक-एक युवा सड़कों पर होगा और पूरी दिल्ली प्रदर्शनकारियों से पट जाएगी।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े जन-आंदोलन को दबाने के लिए पुलिसिया बल का प्रयोग किया गया हो, लेकिन सोनम वांगचुक जैसी वैश्विक हस्ती पर की गई इस कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है। आइए समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे के मुख्य पहलू:
NEET-UG 2024-25 का विवाद: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में बड़े पैमाने पर पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स और कतिपय केंद्रों पर संदिग्ध टॉपर्स की बाढ़ आने के बाद से पूरे देश के लाखों छात्र सड़कों पर हैं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर सीबीआई तक इस मामले की जांच में जुटे हैं, लेकिन छात्रों का असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है।
लद्दाख से दिल्ली तक वांगचुक का संघर्ष: सोनम वांगचुक सिर्फ शिक्षा सुधार ही नहीं, बल्कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लंबे समय से अनशन करते रहे हैं। युवाओं के भविष्य से जुड़े NEET मुद्दे पर उनका समर्थन इस आंदोलन को एक राष्ट्रीय नैतिक बल दे रहा था।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस: जंतर-मंतर को भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का गढ़ माना जाता है। ऐसे में एक अनशनकारी को स्वास्थ्य की आड़ में जबरन हटाए जाने को विपक्षी दल और सामाजिक संगठन अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहे हैं।
फिलहाल सफदरजंग अस्पताल के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। लेकिन दिपके और CJP की इस खुली चुनौती के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि यह आंदोलन अब सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह पूरी राजधानी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
Updated on:
19 Jul 2026 04:46 pm
Published on:
19 Jul 2026 04:27 pm
