
सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें विधायक को 'पब्लिक सर्वेंट' नहीं माना गया था। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने दो टूक कहा कि MLA लोक सेवक है और उस पर पॉस्को एक्ट लागू होगा। इस आदेश के बाद सेंगर को वापस सलाखों के पीछे जाना होगा। कोर्ट ने हाई कोर्ट को अब दो महीने के भीतर मुख्य अपील पर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
उन्नाव रेप केस में हाई कोर्ट ने सेंगर को यह कहकर छोड़ दिया था कि वह अपराध के समय एक पब्लिक सर्वेंट नहीं था, इसलिए पॉस्को (POCSO) की कड़ी धाराएं नहीं लगनी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने दो टूक शब्दों में कहा कि 'हम हाई कोर्ट के उस अत्यधिक तकनीकी निष्कर्ष का समर्थन नहीं करते कि POCSO के तहत कोई MLA 'लोक सेवक' नहीं है।' अदालत ने साफ कर दिया कि विधायक जनता का सेवक है और उस पर कानून बराबर लागू होगा।
सेंगर की रिहाई के बाद जो ड्रामा दिल्ली की सड़कों पर हुआ, उसने देश को झकझोर दिया था। पीड़िता और उसकी मां को सुरक्षा के नाम पर परेशान किया गया। बस से धक्का देने जैसी डरावनी तस्वीरें सामने आईं। उस वक्त पीड़िता की मां ने रोते हुए मीडिया से कहा था कि 'हमें इंसाफ नहीं मिला। मेरी बेटी को बंधक बना लिया गया है। ऐसा लगता है कि वे हमें मार डालना चाहते हैं।' अब सुप्रीम कोर्ट के इस एक्शन से परिवार को बड़ी उम्मीद जगी है।
पिछली सुनवाई में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरिश वैद्यनाथन की बेंच ने सेंगर को 15 लाख के बांड पर जमानत दी थी। कोर्ट ने माना था कि सेंगर 7.5 साल की जेल काट चुका है जो कानूनन काफी है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी दलीलों को किनारे कर दिया है। बांगरमऊ के पूर्व विधायक के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं क्योंकि हाई कोर्ट को अब 2 महीने के अंदर अंतिम फैसला सुनाना होगा।
Published on:
15 May 2026 05:31 pm
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