
Supriya Sule in Lok Sabha (Photo: IANS)
Supriya Sule in Lok Sabha: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिस मां का बच्चा वहां मौजूद था, उसकी पीड़ा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा मैं भी एक मां हूं। सुले ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई संसद के बाहर भी लड़ी जा सकती है लेकिन यहां चर्चा छात्रों के भविष्य की होनी चाहिए।
उन्होंने शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के सहयोगी भी मान रहे हैं कि अगर धर्मेंद्र प्रधान ने 15 दिन पहले इस्तीफा दे दिया होता तो हालात शायद अलग होते। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को वरिष्ठ नेताओं, जैसे मुरली मनोहर जोशी, की सलाह पर भी ध्यान देना चाहिए था।
शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा। इस दौरान ट्रेजरी बेंच से टोका-टाकी हुई तो उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने भी पढ़ाई की है जब बिजली थी, सड़कें थीं और ट्रेनें समय पर चलती थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे बुलेट ट्रेन से पढ़ने नहीं गए थे और जिन सड़कों को चौड़ा किया गया उसमें किसानों की जमीन भी गई।
सुले ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि वह किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच चाहती हैं। इसी दौरान उन्होंने कहा समोसा चीन के पैसे से, चाय पाकिस्तान के पैसे से आई है ये सब अब नहीं चलने वाला। उन्होंने महाराष्ट्र में पुलिस के सामने अकेले खड़ी एक छात्रा की वायरल तस्वीर का भी जिक्र किया और कहा कि देश ने बेटियों को जिस आत्मविश्वास और ताकत के साथ आगे बढ़ाया है वही उस तस्वीर में दिखाई देता है।
समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने भी लोकसभा में चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए कानून लागू हो चुका था तो उसके बाद भी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। उन्होंने कहा कि यह या तो किसी बड़े षड्यंत्र का संकेत है या फिर सरकार की पूरी व्यवस्था में 'स्थायी लीकेज' है।
डिंपल यादव ने कहा कि पिछले 40 दिनों में 20 छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने अपने भाषण में इन छात्रों का एक-एक कर नाम लेते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही कहा कि Gen-Z के युवाओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की आवाज उठाई, जिसकी सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और विभिन्न दलों के सांसद व विधायक जंतर-मंतर राजनीति करने नहीं, बल्कि छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि 18 जून को वह स्वयं जंतर-मंतर गई थीं और वहां सोनम वांगचुक से भी मुलाकात की थी। डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि उस दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों के विपरीत था। उन्होंने कहा कि देश लोकतंत्र की बात करता है लेकिन सवाल यह है कि क्या लोगों को अपनी बात रखने की वास्तविक स्वतंत्रता मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर से आए छात्र केवल अपनी मांगें रखने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने पहुंचे थे लेकिन सरकार का रवैया निराशाजनक रहा। भाषण के अंत में उन्होंने सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने और अमेरिका के सामने झुकने का भी आरोप लगाया।
Updated on:
28 Jul 2026 07:06 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:35 pm
