
चीन-ताइवान में बढ़ा तनाव। फोटो में चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (सोर्स: ANI)
ताइवान के आसमान और समुद्र में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। चीन की सेना पीएलए लगातार ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रही है। रविवार सुबह 6 बजे तक ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीन के 4 फाइटर जेट, 6 नौसैनिक जहाज और 9 सरकारी जहाज उनके इलाके में घूमते पाए गए।
ताइवान के लिए सबसे चिंता की बात यह रही कि 4 में से 2 विमान सीधे मीडियन लाइन पार कर गए। वह ताइवान के उत्तरी व दक्षिण-पश्चिमी हवाई क्षेत्र यानी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में घुस आए। ताइवान की सेना ने ट्विटर पर लिखा कि उनकी सेना पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है और उसी हिसाब से जवाब दिया गया।
शनिवार सुबह 6 बजे तक चीन के पूरे 14 फाइटर जेट, 6 नौसैनिक जहाज और 8 सरकारी जहाज ताइवान के समुद्री इलाके में मौजूद थे। इनमें से 11 विमानों ने मीडियन लाइन पार करते हुए ताइवान के हवाई क्षेत्र में एंट्री ली। बीते एक ही हफ्ते में चीन की सैन्य सक्रियता में साफ तेजी देखी गई है।
जमीन और आसमान के अलावा ताइवान समुद्र के भीतर भी अपनी ताकत बढ़ा रहा है। जून महीने में ताइवान की पहली स्वदेशी पनडुब्बी कहसुंग बंदरगाह से समुद्री परीक्षण के लिए निकली थी, जिसमें डाइविंग टेस्ट भी शामिल थे। फोकस ताइवान की रिपोर्ट के मुताबिक यह पनडुब्बी का 15वां समुद्री ट्रायल था और डूबकर चलने का नौवां टेस्ट। साफ है कि ताइवान भी चीन के दबाव के बीच अपनी सुरक्षा तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता।
चीन का दावा है कि ताइवान उसका अभिन्न हिस्सा है, और यह बात उसकी सरकारी नीतियों और कानूनों में भी दर्ज है। इसकी जड़ें इतिहास में बहुत पुरानी हैं। साल 1683 में किंग वंश ने मिंग वफादारों को हराकर ताइवान पर कब्जा किया था, और तभी से चीन इसे अपना क्षेत्र मानता आया है।
दूसरी तरफ ताइवान की अपनी सरकार, अपनी सेना और अपनी अलग अर्थव्यवस्था है। यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया के मुताबिक ताइवान का दर्जा आज भी अंतरराष्ट्रीय बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जो संप्रभुता, आत्मनिर्णय के अधिकार और किसी देश के मामलों में दखल न देने जैसे कानूनी सिद्धांतों की परीक्षा लेता रहता है।
Updated on:
09 Aug 2026 09:04 am
Published on:
09 Aug 2026 08:45 am
