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तमिलनाडु में विजय राज्यपाल से मिले, सरकार बनाने का दावा पेश किया

DMK vs Congress:तमिलनाडु में कांग्रेस और टीवीके के गठबंधन पर सियासत गरमा गई है। सांसद जोतिमणि ने डीएमके के आरोपों का पलटवार करते हुए उन्हें 2014 के धोखे की याद दिलाई है।

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भारत

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MI Zahir

May 06, 2026

TVK chief Vijay meets Governor Rajendra Arlekar

टीवीके प्रमुख विजय ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की । (फोटो: ANI)

Election: तमिलनाडु में सियासत का पारा बहुत गर्म हो गया है । प्रदेश में सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कजगम'की धमाकेदार चुनावी एंट्री ने दशकों पुराने डीएमके और एआईएडीएमके के एकाधिकार को जड़ से हिला दिया है। इस सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा उलटफेर कांग्रेस ने किया है, जिसने अपने पुराने और प्रमुख सहयोगी डीएमके का साथ छोड़ कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राज्य में अगली सरकार बनाने के लिए तमिलनाडु कांग्रेस के प्रमुख के. सेल्वपेरुंथगई और प्रभारी गिरीश चोडंकर सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने टीवीके मुख्यालय पहुंचकर थलापति विजय से मुलाकात की और गठबंधन पर मुहर लगाई। उन्होंने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की।

सरकार बनाने का नया समीकरण और आंकड़ों का गणित

तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 118 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए होता है। मौजूदा परिणामों के अनुसार, टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें अपनी झोली में डाली हैं, जबकि कांग्रेस के पास 5 सीटें हैं। दोनों पार्टियों के एक साथ आने से यह आंकड़ा 113 हो जाता है, जो बहुमत से केवल 5 कदम दूर है। इस कमी को पूरा करने के लिए टीवीके अब एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी के संपर्क में है, जिनकी पार्टी ने 47 सीटें जीती हैं। सत्ता के इस नए गठबंधन पर मुहर लगाने के लिए तमिलनाडु कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई और राज्य प्रभारी गिरीश चोडंकर सहित कई बड़े नेताओं ने टीवीके मुख्यालय जाकर थलापति विजय से खास मुलाकात की है।

कांग्रेस का बचाव: गठबंधन टूटना और बनना एक स्वाभाविक प्रक्रिया

डीएमके का साथ छोड़ने पर हो रही चौतरफा आलोचनाओं का कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कड़ा जवाब दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक लंबा बयान जारी करते हुए उन्होंने इस फैसले को राज्य के हित में बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन हमेशा के लिए नहीं होते; उनका बनना और टूटना एक बेहद स्वाभाविक प्रक्रिया है।

स्टालिन पर तीखी बयानबाजी करना कांग्रेस की संस्कृति नहीं

डीएमके को आईना दिखाते हुए ज्योतिमणि ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस वक्त चुनाव की घोषणा से ठीक एक हफ्ते पहले डीएमके ने कांग्रेस को गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। तब कांग्रेस को मजबूरी में अकेले लड़ना पड़ा था, लेकिन पार्टी ने इसे महज एक 'राजनीतिक कदम' माना था और कोई कड़वाहट नहीं दिखाई थी। ज्योतिमणि ने मर्यादा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि अब जब मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हार का सामना करना पड़ा है, तो उन पर तीखी बयानबाजी करना कांग्रेस की संस्कृति नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि राहुल गांधी देश के एक मजबूत नेता हैं और उन्हें किसी से भी 'अच्छे आचरण के प्रमाण पत्र' की कोई जरूरत नहीं है।

डीएमके में भारी उबाल: कांग्रेस पर 'धोखे' का आरोप

कांग्रेस के इस अप्रत्याशित यू-टर्न से डीएमके खेमे में भारी नाराजगी और बौखलाहट है। डीएमके नेता सरवनन अन्नादुरई ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की पीठ में छुरा घोंपना करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला बेहद संकीर्ण और बिना दूरदर्शिता वाला है, जिसका खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। अन्नादुरई ने यह भी चिंता जताई कि 2029 के आम चुनावों से पहले कांग्रेस के इस कदम ने देश भर में यह धारणा बना दी है कि वे एक अस्थिर सहयोगी हैं और उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, थलापति विजय की शानदार सियासी एंट्री और कांग्रेस के पाला बदलने से तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह से एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है, जहां दशकों पुराने समीकरण अब इतिहास बन गए हैं। (इनपुट: ANI)