
सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल की याचिका खारिज, photo credit: ANI
Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रेप के दोषी और 'तहलका' के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की सजा के खिलाफ अपनी अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक सरेंडर करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया।
जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने तेजपाल को कोर्ट में सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का भी निर्देश दिया। सिंगल-जज बेंच उनकी क्रिमिनल अपील को 22 सितंबर को लिस्ट करने पर भी सहमत हो गई, बशर्ते वह तब तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर दें।
2013 रेप केस मामलेे में सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की। सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय करने पर सहमति जताई है, बशर्ते वह समय पर आत्मसमर्पण कर दें। तेजपाल ने अपनी अपील में हाई कोर्ट द्वारा पीड़िता के सबूतों और उन्हें दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए अन्य सबूतों के मूल्यांकन को चुनौती दी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त, 2026 को तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया और 2021 में मिली उनकी बरी को पलटते हुए उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। गोवा सरकार ने अलग से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 10 साल की कारावास की सजा को बढ़ाने की मांग की।
तेजपाल ने इस आधार पर सरेंडर से छूट मांगी थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील लिस्ट होनी चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए। तेजपाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कोर्ट के पास उचित मामले में सरेंडर की जरूरत से छूट देने और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी क्रिमिनल अपील को लिस्ट करने की शक्ति है।
गोवा राज्य की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने अर्जी का विरोध किया और कहा कि छूट की अर्जी पर मामले की मेरिट के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया और कहा कि मामले में रेप का गंभीर अपराध शामिल है, जिसके लिए तेजपाल को 10 साल की कठोर सजा सुनाई गई थी।
Updated on:
25 Aug 2026 02:57 pm
Published on:
25 Aug 2026 02:36 pm
