
Jammu & Kashmir Lieutenant Governor Manoj Sinha(Image-ANI)
जम्मू-कश्मीर में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा(Manoj Sinha) ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि यहां ड्रग्स का नेटवर्क सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि आतंकवाद से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जो चिंता की बात है। लेकिन इससे भी ज्यादा गंभीर यह है कि इस पूरे रैकेट के पीछे आतंकी फंडिंग और अस्थिरता फैलाने की साजिश हो सकती है।
एलजी सिन्हा के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स का मुद्दा एक सामान्य कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। इसे अब 'नार्को-टेरर' के नजरिए से देखा जा रहा है। यानी नशे के जरिए न सिर्फ युवाओं को कमजोर किया जा रहा है, बल्कि इससे मिलने वाला पैसा आतंकवादी गतिविधियों में भी इस्तेमाल हो सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 11 अप्रैल से एक विशेष 100-दिवसीय अभियान शुरू किया है। यह अभियान तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है। डिसरप्शन- ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ना और नेटवर्क को खत्म करना। अवेयरनेस- गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना। रिकवरी- नशे की चपेट में आ चुके लोगों का इलाज और पुनर्वास। यह पहल Nasha Mukt Bharat Abhiyaan से प्रेरित है, जिसे 2020 में प्रधानमंत्री ने शुरू किया था।
एलजी ने कहा कि इस अभियान को अब सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन का रूप मिल रहा है। पुलिस, प्रशासन और आम जनता मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं। परिवार, स्थानीय नेता और समाज के अन्य लोग भी आगे आकर नशे के शिकार युवाओं की पहचान कर रहे हैं और उन्हें सही रास्ते पर लाने में मदद कर रहे हैं।
प्रशासन का फोकस दो मोर्चों पर है। एक तरफ सीमाओं पर निगरानी बढ़ाकर ड्रग्स की एंट्री रोकना, और दूसरी तरफ समाज के अंदर जागरूकता फैलाना। ताकि नशे की मांग ही खत्म हो सके। इसी अभियान को और मजबूत करने के लिए 3 मई को Mega Padyatra for Drug-Free Jammu and Kashmir का आयोजन किया जा रहा है। यह पदयात्रा श्रीनगर के TRC Football Stadium में होगी।
Published on:
02 May 2026 05:15 pm
