
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (बाएं) और ऋतब्रत बनर्जी (Photo-IANS)
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की तीन राज्य सभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर ईसी ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन सीटों पर 24 जुलाई को मतदान होगा। वहीं अब टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सभा के उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग को जल्द यह तय करना पड़ सकता है कि टीएमसी की असली दावेदारी कौन-सी गुट है।
बता दें कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस समय अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। विधानसभा से लेकर संसद तक पार्टी टूट गई है। एक गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं वहीं दूसरे गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं।
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्य सभा उपचुनाव ममता बनर्जी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं माना जा रहा है दोनों गुट अलग-अलग प्रत्याशी भी उतार सकते हैं, ऐसे में चुनाव आयोग के सामने यह तय करने की चुनौती होगी कि आधिकारिक TMC उम्मीदवार कौन है?
यदि तब तक फैसला नहीं हो पाता, तो चुनाव आयोग पार्टी के नाम और चिन्ह को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी पहचान और चुनाव चिन्ह दे सकता है।
इस मामले में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का कहना है कि आयोग फिलहाल TMC का नाम और 'जुड़वां फूल' चुनाव चिन्ह फ्रीज कर सकता है और दोनों गुटों को अस्थायी नाम, जैसे TMC-A और TMC-B, देकर चुनाव लड़ने की अनुमति दे सकता है। अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा।
राज्य सभा चुनाव में राजनीतिक दल अपने अधिकृत एजेंट की नियुक्ति के लिए Form-22A जमा करते हैं। यदि दोनों गुट अलग-अलग फॉर्म दाखिल करते हैं, तो चुनाव आयोग को मतदान से पहले ही यह तय करना होगा कि वैध अधिकृत प्रतिनिधि कौन है।
अब सबसे बड़ा सवाल है कि चुनाव आयोग असली टीएमसी का नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला कैसे करेगा। तो बता दें कि चुनाव चिन्ह ( आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के तहत चुनाव आयोग तीन आधारों पर तय करता है कि किसी पार्टी का असली अधिकार किसके पास है…
चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत चुनाव आयोग तीन आधारों पर तय करता है कि किसी पार्टी का असली अधिकार किसके पास है—
1- पार्टी के उद्देश्य और सिद्धांत
2- पार्टी का संविधान
3- संगठन और विधायकों में बहुमत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में बहुमत का परीक्षण सबसे अहम माना जा रहा है, हालांकि केवल विधायकों का बहुमत ही अंतिम आधार नहीं होगा।
वहीं चुनाव आयोग 14 जुलाई तक कोई फैसला नहीं देता है तो टीएमसी के नाम पर दोनों गुट से अलग-अलग प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर किसी एक या दोनों के नामांकन खारिज कर सकते हैं और मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
राज्य सभा चुनाव में उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायक या विधानसभा के कुल सदस्यों के 10% प्रस्तावक होना जरूरी है। दोनों गुटों के पास इतनी संख्या मौजूद बताई जा रही है।
बता दें कि ममता बनर्जी की पार्टी का शिवसेना जैसा हाल हो सकता है। 2022 में शिवसेना में ऐसी ही टूट हुई। इसके बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया था। मुंबई के अंधेरी पूर्व विधानसभा उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए थे। करीब चार महीने बाद आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे गुट को सौंप दिया था।
Updated on:
07 Jul 2026 07:03 am
Published on:
07 Jul 2026 07:02 am
