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शताब्दी रॉय और मिताली बाग के खिलाफ महुआ मोइत्रा का बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को सौंपी अयोग्यता याचिका

बागी TMC सांसदों के मामले पर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि हमने अयोग्यता की याचिका दी है। आम तौर पर अयोग्यता की याचिका एक समूह की तरफ से दी जाती है, लेकिन हमने इसे अलग-अलग दिया है।

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Mahua Moitra

सांसद महुआ मोइत्रा

TMC MP Mahua Moitra: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। TMC के नेता पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पाटी को छोड़ कर जा रहे है। बीते दिन TMC के 20 बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने एक बार फिर बागी सांसदों पर जोरदार हमला बोला है। महुआ मोहत्रा ने कहा कि ​हमने अयोग्यता की याचिका दी है। आम तौर पर अयोग्यता की याचिका एक समूह की तरफ से दी जाती है, लेकिन हमने इसे अलग-अलग दिया है। हमने मिताली बाग और शताब्दी रॉय के मामले में अलग-अलग याचिका दी है।

'देश का कानून एक तरफ और उसका पालन दूसरी तरफ'

बागी सांसदों पर हमला बोलते हुए TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि हर मामले में हमने एक उदाहरण दिया है। अब हम क्या कर सकते हैं? हमने इसे स्पीकर को सौंप दिया है। आप जानते हैं कि हमारे देश में कानून एक चीज है और उसे लागू करना दूसरी चीज। इसलिए, अगर स्पीकर इस पर ध्यान नहीं देते हैं, तो यह मामला 3 महीने, 6 महीने या जितने भी समय तक लटका रहेगा। हमने साफ़ तौर पर कहा है कि अगर वे तृणमूल पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए।

20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर

महुआ मोइत्रा ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून बहुत साफ है। हमने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून के तहत सभी 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं। इन सभी 20 सांसदों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे अब TMC का हिस्सा नहीं हैं और किसी दूसरी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। इसलिए, वे अयोग्य हो जाते हैं।

बागी सांसदों को दिया खुला चैलेंज

उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची का चौथा हिस्सा भी साफ तौर पर कहता है कि विलय के मामले में, विलय राजनीतिक पार्टी का होना चाहिए, न कि विधायी पार्टी का। राजनीतिक पार्टी TMC है और उस पार्टी का, उसकी सभी कमेटियों के साथ, विलय नहीं हुआ है। इसलिए, वे अयोग्य हो जाते हैं। ये सभी लोग ममता बनर्जी के चुनाव चिह्न और उनके नेतृत्व में चुने गए थे। इनमें से कोई भी अपने दम पर वोट नहीं पा सकता था। वे पहले हमारे साथ थे, लेकिन अब, फायदे के लालच या डर की वजह से सुरक्षा पाने के लिए, उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। कुछ के लिए यह डर है, तो कुछ के लिए लालच। इनमें से किसी के लिए भी यह जमीर का मामला नहीं है।