
टीएमसी के एक गुट की सांसद सयोनी घोष। ( फोटो: ANI)
Saayoni Ghosh Reaction: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के 20 बागी सांसदों के सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने से पहले इस गुट की एक सांसद सायोनी घोष और माला रॉय रविवार को दिल्ली पहुंच गईं। घोष ने पत्रकारों से कहा कि मौजूदा सियासी घटनाक्रम पर मैं अभी कुछ नहीं बोलूंगी, जब सही समय आएगा, तब बोलूंगी। उस समय आपको पता चल जाएगा। मैं अभी कोई जवाब नहीं दूंगी और केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को ही जवाब दूंगी। मुझे यकीन है कि मेरी आवाज आगे भी पहुंचेगी।'उधर सांसद माला रॉय इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पहुंची हैं। दक्षिण कोलकाता की सांसद ने 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी के लिए मौजूदा समय बहुत अहम है। कई नेता उन्हें छोड कर जा चुके हैं और हालात ऐसे हैं कि कब कौन बगावत करेगा, पता नहीं चल रहा है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने से पहले बागी गुट सोमवार शाम को एक बैठक करेगा ,जिसमें अंतिम रणनीति तय की जाएगी। इस मीटिंग में अध्यक्ष को सौंपने के लिए मसौदा तैयार तैयार किया जाएगा। ये बागी सांसद सोमवार को संसद में अध्यक्ष के समक्ष एक पूर्ण स्वतंत्र या संसदीय समूह या गुट के रूप में औपचारिक आवेदन करेगा।
उल्लेखनीय है कि टीएमसी में बगावत और भाजपा नेताओं के साथ बैठक के बाद पार्टी के 19 सांसदोें की एक सूची सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, लेकिन शनिवार को दिल्ली में सांसद सुदीप बनर्जी भाजपा नेताओं के साथ मीटिंग करने के बाद बागी गुट में शामिल हो गए, इसके बाद इन सांसदों की तादाद 20 हो गई है।
गौरतलब है कि टीएमसी में जारी बगावत के चलते अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी ममता बनर्जी से मुलाकात कर संकट पर चर्चा कर चुके हैं। वहीं अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो शिकायतें भी दर्ज हो चुकी हैं, इनमें से पहली शिकायत दार्जिलिंग और दूसरी शिकायत दक्षिण 24 परगना जिले में दर्ज की गई है। जिससे पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अब असली गुट कौनसा है और कौनसा गुट मजबूत है।
डेढ दशक तक सत्ता में रही 28 साल से अधिक पुरानी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का कुछ अरसे में ही बिखराव हो गया
चुनाव में हार के बाद टीएमसी कमजोर हो गई, लेकिन ममता के तेवर तीखे ही रहे। बंगाल में 4 मई को चुनाव में हार मिली और ममता की पार्टी को 80 सीटें ही मिली थीं। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी से नाराजगी के बाद 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग हो कर टीएमसी पार्टी बनाई थी, लेकिन हार के बाद पंद्रह दिनों में ही बगावत के कारण पार्टी में बिखराव शुरू हो गया और आज ये हालात हैं कि बागी गुट ममता बनर्जी को अपना दमखम और धौंस दिखा रहा है।
Updated on:
14 Jun 2026 03:22 pm
Published on:
14 Jun 2026 02:50 pm
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