
ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष और ममता बनर्जी (फोटो - आईएएनएस, एएनआई)
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में फूट अब संसद तक पहुंच गई है। ये बागी सांसद अब एक छोटी पार्टी के साथ मिलकर अलग ग्रुप बनाना चाहते हैं। इस बीच, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस पूरे मामले में दोनों पक्षों को सुनने का फैसला किया है।
उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को 19 जून को शाम 5 बजे अपनी चैंबर में बुलाया है। इस पर टीएमसी ने बयान जारी किया है।
टीएमसी ने कहा है कि अभी तक उन्हें स्पीकर की तरफ से कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। इस संबंध में कोई सूचना भी नहीं दी गई है। बता दें कि लोकसभा स्पीकर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।
संसदीय नियमों और एंटी डिफेक्शन कानून के तहत ये मामला काफी अहम है। अगर बागियों को अलग मान्यता मिल गई तो TMC की संसद में ताकत कम हो जाएगी।
20 सांसदों ने दावा किया है कि वे टीएमसी की लोकसभा में दो-तिहाई ताकत रखते हैं। उन्होंने स्पीकर के पास अर्जी दी कि उन्हें अलग ग्रुप के तौर पर मान्यता दी जाए।
ये बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं और संसद में अलग सीटिंग भी मांग रहे हैं।
बागियों में काकोली घोष दस्तिदार और सुदीप बंद्योपाध्याय जैसे नाम भी शामिल हैं। ये घटनाक्रम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की बुरी हार के बाद आया है।
पार्टी के अंदर असंतोष काफी समय से पनप रहा था। कई पुराने नेता अभिषेक बनर्जी के तरीके से नाराज थे। अब ये नाराजगी संसद तक पहुंच गई है।
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर साफ कहा है कि टीएमसी एक अविभाज्य पार्टी है। कोई भी गुट अलग नहीं बन सकता।
उन्होंने कहा कि कानून और संविधान के मुताबिक बिना पार्टी की मंजूरी के ऐसा मर्जर संभव नहीं है। टीएमसी की तरफ से किर्ति आजाद और सागरिका घोष जैसी सांसदों ने ये चिट्ठी स्पीकर को सौंपी।
उधर, बागी TMC सांसदों के NCPI में शामिल होने पर सांसद सौगत रॉय ने कहा- NCPI कोई पार्टी भी नहीं है। ये सांसद दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए NCPI की शरण में जा रहे हैं। हम जो कुछ भी करना होगा, करेंगे।
Updated on:
17 Jun 2026 06:43 pm
Published on:
17 Jun 2026 06:40 pm
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