
केसी वेणुगोपाल (ANI)
केरल विधानसभा चुनाव 2026 (Kerala Legislative Assembly Elections 2026) के नतीजे आ चुके हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने भारी मतों से जीत हासिल कर ली है और राज्य में 10 साल बाद सत्ता वापस करने जा रहा है। LDF की सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। लेकिन जीत की खुशी मनाने से पहले ही कांग्रेस पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर तीखी खींचतान शुरू हो गई है। पार्टी हाईकमान के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि तीन-चार मजबूत दावेदार मैदान में हैं। पोस्टरबाजी, दिल्ली में गहमागहमी, विधायकों से संपर्क और अंदरूनी लॉबीिंग अब खुलकर सामने आ रही है।
पार्टी हाईकमान के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि तीन-चार मजबूत दावेदार मैदान में हैं। पोस्टरबाजी, दिल्ली में गहमागहमी, विधायकों से संपर्क और अंदरूनी लॉबीिंग अब खुलकर सामने आ रही है।
केसी वेणुगोपाल को वर्तमान में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी संगठन में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। वे लगातार विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं और उनके समर्थन जुटाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने आलाकमान से मुलाकात के लिए दिल्ली भी रवाना हो चुके हैं।
वीडी सतीशन चुनाव प्रचार के दौरान LDF सरकार पर आक्रामक हमलों के लिए चर्चा में रहे। उनकी वजह से कार्यकर्ताओं में जोश भरा गया, जिसका असर UDF की जीत पर साफ दिखा। जमीनी स्तर पर उनके समर्थन की ताकत सबसे ज्यादा बताई जा रही है। वे भी हाईकमान के सामने अपना दावा पेश करने की तैयारी में हैं।
रमेश चेन्निथला तीनों में सबसे अनुभवी नेता हैं। पार्टी के साथ-साथ गठबंधन के अन्य दलों में भी उनकी अच्छी छवि और साख है। उनके समर्थक उन्हें स्थिर, संतुलित और अनुभवी नेतृत्व के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में चेन्निथला ही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं।अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान इन तीनों में से किसे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपता है। फैसला जितना आसान लग रहा है, उतना शायद नहीं भी हो, क्योंकि तीनों ही नेता अपनी-अपनी ताकत के साथ पूरी तैयारी में हैं।
इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है, हालांकि वे अभी लोकसभा सांसद हैं और सीधे दावेदारी नहीं कर रहे। वहीं, UDF में शामिल सहयोगी दलों खासकर IUML को भी संतुष्ट करना होगा। जातीय और सामुदायिक समीकरण, ईसाई और मुस्लिम वोट बैंक का संतुलन तथा पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी को साधना चुनौतीपूर्ण होगा। कांग्रेस ने चुनाव से पहले कोई चेहरा घोषित नहीं किया था, इसलिए अब फैसला विधायक दल और हाईकमान की संयुक्त बैठक में होगा।
Published on:
05 May 2026 08:36 am
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