
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी। (File Photo- IANS)
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने आशा और आंगनवाड़ी बहनों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य सरकार ने इस महीने से उनकी सैलरी बढ़ा दी है।
बता दें कि ये महिलाएं दिन-रात शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों की सेवा में लगी रहती हैं, लेकिन पहले उनकी मेहनत के हिसाब से तनख्वाह नहीं मिलती थी। अब सरकार ने इस कमी को दूर करने का फैसला लिया है।
आंगनवाड़ी वर्कर अब हर महीने 14,000 रुपये मानदेय पाएंगी। पहले ये राशि काफी कम थी। आंगनवाड़ी हेल्पर को 11,800 रुपये प्रति माह मिलेंगे। वहीं आशा वर्करों को 11,250 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।
बता दें कि ये महिलाओं गांव-गांव में घूमकर टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, कुपोषित बच्चों की पहचान और इलाज जैसा काम करती हैं। कोविड के समय इन्होंने जान की परवाह किए बिना लोगों तक दवा और जानकारी पहुंचाई।
राज्य में दो लाख से ज्यादा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और करीब 65 हजार आशा वर्कर काम करती हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, जो घर संभालते हुए समाज की सेवा करती हैं।
इस बारे में सरकार का कहना है कि ये महिलाएं राज्य के स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों की रीढ़ हैं। इन्हें मजबूत किए बिना गांवों में विकास मुश्किल है।
इस बढ़ोतरी के लिए बजट में अलग से प्रावधान किया गया है। नई सैलरी से इनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और घर चलाने में आसानी होगी।
लंबे समय से आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग कर रही थीं। कई बार प्रदर्शन भी हुए। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही इनकी मांगों पर ध्यान दिया और तुरंत कार्रवाई की।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद से कई फैसले लिए जा चुके हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम ऐलान एक के बाद एक हो रहे हैं।
नई सरकार ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी द्वारा शुरू किए गए सभी धर्म-विशेष कल्याण योजनाओं को बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर है।
Updated on:
09 Jul 2026 09:16 pm
Published on:
09 Jul 2026 08:55 pm
