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फरार TMC विधायक दिलीप मंडल गिरफ्तार, बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने पुरी से पकड़ा

पश्चिम बंगाल के TMC विधायक Dilip Mondal को ओडिशा के पुरी से STF ने गिरफ्तार किया। अवैध हथियार, धमकी और आय से अधिक संपत्ति को लेकर होगी पूछताछ।

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Dilip Mondal

तृणमूल कांग्रेस विधायक दिलीप मंडल (Photo - @X )

Dilip Mondal: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर सनातन धर्म पर कथित विवादित टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री ममता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फरार TMC विधायक दिलीप मंडल को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार कर लिया है। वे पिछले कई सप्ताह से पुलिस से बचते हुए फरार चल रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, दक्षिण 24 परगना जिले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था। बेटे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें विधायक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। इसके बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए दिलीप मंडल फरार हो गए। पुलिस को चकमा देने के लिए वे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे, लेकिन खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी के आधार पर STF ने आखिरकार उन्हें पुरी से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ला रही है। कोलकाता पहुंचने के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अदालत से लंबी कस्टडी की मांग कर सकती है, ताकि अवैध हथियार, धमकी और आय से अधिक संपत्ति जैसे मामलों में उनसे गहन पूछताछ की जा सके। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे मामले में कुछ अन्य प्रभावशाली और सफेदपोश लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

कौन हैं बिष्णपुर विधायक?

दिलीप मंडल दक्षिण 24 परगना जिले की बिष्णुपुर विधानसभा सीट से TMC विधायक हैं। गिरफ्तारी से पहले उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हो चुकी थीं। हाल ही में भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित रूप से धमकी देने वाले एक वायरल वीडियो को लेकर भी उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए थे। इसी सिलसिले में पुलिस ने उनके पायलान स्थित आवास पर छापेमारी की थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का भी रुख किया था।