
Amit Shah, Suvendu Adhikari
West Bengal CM face: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी मुख्यमंत्री चेहरे की चर्चा होती है, तो अब एक नाम सबसे आगे नजर आता है, सुवेंदु अधिकारी। ममता बनर्जी के पूर्व करीबी रहे अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी अहम सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की है। उन्होंने TMC के अंदरूनी ढांचे और वोट बैंक को करीब से समझा है, जिससे वे पार्टी के लिए मजबूत रणनीतिक चेहरा बन गए हैं। BJP उन्हें हिंदुत्व और आक्रामक राजनीति का प्रमुख चेहरा मानती है। 207 सीटों की बड़ी जीत के बाद पार्टी को कोई और मजबूत विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
सुवेंदु अधिकारी को लेकर BJP का सबसे बड़ा भरोसा उनकी चुनावी जीतों से जुड़ा है। खासकर नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी सीटों पर उनकी जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। भवानीपुर, जिसे ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहां सुवेंदु अधिकारी की जीत ने सबको चौंका दिया। उन्होंने ममता बनर्जी को 73,917 वोट हासिल किए जबकि ममता को 58,812 वोट मिले। यानी 15,105 वोटों के अंतर से उन्होंने यह मुकाबला जीता। यह जीत इसलिए भी बड़ी मानी गई क्योंकि भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत किला माना जाता रहा है।
सुवेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत उनका तृणमूल कांग्रेस के अंदर लंबा अनुभव है। वे करीब दो दशक तक TMC में रहे और पार्टी की संरचना, रणनीति और वोट बैंक को बहुत करीब से समझते हैं। उन्होंने साल 1995 में कोंटाई नगर पालिका से पार्षद के रूप में शुरुआत की, जिसके बाद 1998 में TMC में शामिल हुए और नंदीग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। वे सांसद और मंत्री भी रहे और बाद में नंदीग्राम से विधायक बने। साल 2020 में BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने TMC के खिलाफ सबसे मजबूत मोर्चा खोल दिया।
BJP के लिए अधिकारी का एक बड़ा आकर्षण उनका हिंदुत्व आधारित राजनीतिक रुख भी है। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर की जीत के बाद हिंदू वोटरों की भूमिका को खुलकर स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था, इस बार मैंने लगभग दस हजार वोटों से चुनाव जीता। नंदीग्राम के हिंदू लोगों ने मुझे फिर से जिताया। वहां, पूरा मुस्लिम वोट TMC को गया। मैं नंदीग्राम के हिंदुओं के लिए काम करूंगा, विधानसभा चुनाव के नतीजों के एक दिन बाद सुवेंदु अधिकारी ने यह बात कही। यह बयान BJP की विचारधारा के अनुरूप माना गया।
सुवेंदु अधिकारी अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। रैलियों में राम राज्य की बात हो या TMC पर हमले, उन्होंने हमेशा तीखा रुख अपनाया है। सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को BJP की मजबूत हिंदुत्ववादी आवाज के रूप में पेश किया। भाबनीपुर में राम नवमी रैलियों का नेतृत्व और 'राम राज्य' के आह्वान से लेकर हिंदू मतदाताओं को श्रेय देने तक, उन्होंने BJP की विचारधारा को मजबूती दी। उन्होंने घुसपैठ, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण और कानून-व्यवस्था पर TMC को घेरा। 207 सीटों की BJP जीत के बाद उनकी आक्रामक छवि और मजबूत हो गई।
BJP के अंदर कई नेता मजबूत प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कोई भी सुवेंदु अधिकारी के स्तर तक नहीं पहुंच पाया। अग्निमित्रा पॉल ने आसनसोल दक्षिण सीट से 40,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की, जबकि दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर सीट से अपनी पकड़ मजबूत की। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व के सामने यह साफ था कि जमीनी पकड़, संगठन और राजनीतिक प्रभाव के मामले में अधिकारी का कोई सीधा विकल्प फिलहाल नहीं है।
Published on:
08 May 2026 08:50 pm
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