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Women’s Day: जब मौका मिला तो लिया बड़ा फैसला और आज बन गई सफल बिजनेसवुमेन

टीचर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वालीं नीलम सिंह ने अपनी मेहनत, काबिलियत और आत्मविश्वास के दम पर अपना एक बड़ा साम्राज्य स्थापित किया है...

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जब मौका मिला तो लिया बड़ा फैसला और आज बन गई सफल बिजनेसवुमेन

जब मौका मिला तो लिया बड़ा फैसला और आज बन गई सफल बिजनेसवुमेन

एक सफल आंत्रप्रेन्योर बनने के लिए क्या चाहिए -अच्छी प्लानिंग, जोश, जुनून और जज्बा, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है - आपदा में अवसर खोजने की कला। नीलम सिंह को कई साल पहले एक अवसर तब नजर आया, जब उनकी कंपनी एक परेशानी में घिर गईं। नीलम ने न केवल अपनी कंपनी को उस परेशानी से बाहर निकाला बल्कि उस आपदा को अपने लिए एक अवसर में भी तब्दील किया।

सर्विस क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वालीं नीलम आज एक सफल आंत्रप्रेन्योर हैं और अनगिनत महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नीलम आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचना उनके लिए भी आसान नहीं था। उन्होंने तमाम उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन अपने अंदर के जुनून को जिंदा रखा और सही मौके का इंतजार किया और जब मौका मिला तो उन्होंने उसे हाथ से नहीं जाने दिया। नीलम अपने परिवार की एकमात्र सदस्य हैं, जिन्होंने कारोबारी दुनिया में न केवल हाथ आजमाया बल्कि अपनी काबलियत का लोहा भी मनवाया।

टीचिंग से शुरुआत पर आज है बड़े एम्पायर की मालकिन

नीलम ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षा क्षेत्र से की। वह आगरा के आर्मी स्कूल में 11वीं और 12वीं के बच्चों को पढ़ाया करती थीं, तब उनकी उम्र केवल 21 साल की थी। शादी के बाद वह दिल्ली आ गईं, पर्सनल लाइफ के साथ उनकी प्रोफेशनल लाइफ भी अपग्रेड हुई। उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर का रुख किया। वह आकाश इंस्टिट्यूट से जुड़ीं, जो शिक्षा और प्रबंधन दोनों का मिश्रण है। शिक्षा के प्रति प्यार और प्रबंधन का हुनर, नीलम के लिए यह जैसे कोई मुराद पूरी होने जैसा था। आकाश में उनकी रेपोर्टिंग सीधे एमडी को थी। उन्होंने ट्रांसपोर्ट से लेकर एजुकेशन तक आकाश इंस्टिट्यूट के हर वर्तिकल का कामकाज संभाला। उन दिनों आकाश में पढ़ने के लिए देश के की शहरों से बच्चे दिल्ली आया करते थे (अब आकाश की पहुंच देश के अधिकांश हिस्सों में है)। इन बच्चों के लिए दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था के चुनौती थी। बच्चों के पैरेंट्स ने आकाश इंस्टिट्यूट से कोई ऐसी व्यवस्था करने का अनुरोध किया, जहां बच्चों को pg की परेशानियों से दो-चार न होना पड़े। वह अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाई पर लगा सकें। हालांकि, प्रबंधन ऐसी किसी व्यवस्था के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि यह उसके लिए एक नया सिरदर्द हो सकता था।

नीलम को इस चुनौती में अवसर नजर आया। उन्होंने तुरंत आकाश के प्रबंधन से कहा कि वह आकाश के लिए हॉस्टल चलाने को तैयार हैं। यहीं से उनके आंत्रप्रेन्योर बनने की शुरुआत हुई। नीलम कहती हैं, उस समय मैं केवल आकाश और बच्चों की मदद करना चाहती थी। आकाश इंस्टिट्यूट के साथ मेरा गहरा रिश्ता है। इसलिए मेरा प्रयास यही थी कि किसी तरह यह परेशानी दूर हो जाए। हालांकि, यह बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। बड़ी संख्या में बच्चों की देखरेख जोखिम वाला काम था, भूल से भी किसी भूल की गुंजाइश नहीं थी। मैंने जोखिम लिया और यह मेरी जिंदग़ी का सबसे अच्छा फैसला साबित हुआ।

नीलम सिंह का कहना है कि आंत्रप्रेन्योर बनने के लिए अवसर बनाने पड़ते हैं और कभी-कभी ये अवसर चुनौतियों के साथ आते हैं। आपको उन्हें पहचानना है और पकड़ लेना है, मैंने यही किया। हॉस्टल बिजनेस में झंडे गाड़ने के बाद, नीलम सिंह ने कोर एजुकेशन सेक्टर में जाने का निर्णय लिया। उन्होंने आगरा में स्कूल और कॉलेज की शुरुआत की। Dr MPS World School के नाम से आगरा में उनका स्कूल है और Dr. MPS Group of Institutions के नाम से उनके कॉलेज हैं। इसके अलावा, वह आकाश इंस्टिट्यूट की नजफ़गढ़ फ्रेंचाईजी भी संभालती हैं। उनका 'आशा' हॉस्टल आज भी दिल्ली में आकाश के बच्चों के लिए एक सुरक्षित आशियाना है।

करोना ने दिया बड़ा नुकसान, पर नहीं मानी हार

कोरोना महामारी ने नीलम को भी बड़ी चोट दी, उनका हॉस्टल बिजनेस लगभग ठप हो गया, लेकिन उन्होंने अपने जोश और जज्बे से उसे फिर से खड़ा कर दिया। फर्क बस इतना आया कि पहले यह पैन इंडिया था, फिलहाल केवल दिल्ली तक सीमित है। नीलम की योजना इसे फिर से पहले वाले मुकाम पर ले जाने की है।

कारोबारी दुनिया और पारिवारिक दुनिया के बीच तालमेल बैठाना कितना मुश्किल है? इस सवाल पर नीलम सिंह ने कहा कि मुश्किल तो बहुत है, लेकिन यदि आपने कुछ ठान लिया है तो राह निकल ही आती है। नीलम सिंह आज एक प्राउड बेटी, पत्नी हैं, मां हैं और प्राउड वुमेन हैं - जिन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया, और यह साबित किया कि महिला यदि कुछ ठान ले तो सबकुछ मुमकिन हैं।