
Government schools can be closed
नीमच. शासकीय विद्यालय के प्रति बच्चों और अभिभावकों का रूझान बढ़ाने के लिए जिम्मेदारों ने कमर कस ली है। जैसे ही जून माह से विद्यालय खुलेंगे। शिक्षकों द्वारा गांव की चौपाल पर पहुंचकर शासकीय विद्यालय में मिलने वाली नि:शुल्क सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। ताकि पालक अपने बच्चों को शासकीय विद्यालय में प्रवेश दिलाकर निजी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने से पड़ रहे आर्थिक भार से मुक्त हो सके।
पत्रिका द्वारा शुक्रवार के अंक में प्रकाशित की गई खबर का असर हुआ। पिछले दस सालों में शासकीय विद्यालय में घटी बच्चों की संख्या को देखते हुए जिम्मेदारों ने तुरंत निर्णय लिया कि इस बार नामांकन में बढ़ोतरी करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जाएगा। जिसके तहत गांव, नगर और शहर में शिक्षकों के माध्यम से चौपाल लगाकर अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। ताकि वे अपने बच्चों को निजी विद्यालयों की अपेक्षा शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाए।
डीपीसी डॉ पीएस गोयल ने बताया कि जिले में हर साल शिक्षकों को शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसके चलते शैक्षणिक स्तर में पहले की अपेक्षा काफी सुधार आया है। वहीं शासकीय विद्यालय में बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें, नि:शुल्क यूनिफार्म, विद्यालय दूर होने पर आवागमन में साईकल प्रदान की जाती है। साथ ही दोपहर के समय मध्यान्ह भोजन भी प्रदान किया जाता है। इस प्रकार बेहतर शिक्षा के साथ बच्चों को सभी सुविधाएं नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। इस बारे में उन अभिभावकों को बताया जाएगा, जो अभिभावक जागरूकता के अभाव में अपने बच्चों को निजी विद्यालय में भेज कर हर साल मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। ताकि वे अपने ऊपर पड़ रहे आर्थिक बोझ से मुक्त हो सकें।
स्वच्छता में प्रदेश में नंबर वन रहा नीमच जिला
स्वच्छ विद्यालय योजना के तहत नीमच जिले को देशभर में ३० वां स्थान मिला है। वहीं प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। क्योंकि सभी शासकीय विद्यालयों में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी के तहत नई दिल्ली से स्वच्छ विद्यालय योजना के तहत अवार्ड प्रदान किया गया है।
वर्जन.
शासकीय विद्यालयों में अब पहले की अपेक्षा काफी बेहतर पढ़ाई होती है। बच्चों को स्मार्ट क्लास, ट्रेंड शिक्षकों सहित समय समय पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर उनके ज्ञान में बढ़ोतरी की जाती है। शासकीय विद्यालय में नामांकन की संख्या बढ़ाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। जिसके तहत गांव गांव में चौपाल और शिविर लगाकर अभिभावकों को शासकीय विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताकर जागरूक किया जाएगा। कि वे अपने बच्चों को शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाएं।
-डॉ पीएस गोयल, डीपीसी
Published on:
28 Apr 2018 01:37 pm
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