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एमपी में रावण दहन के बीच अजीबो गरीब घटना, जलते पुतलों पर फायर ब्रिगेड ने पानी डालकर बुझाई आग, Video

Dussehra 2024 : इतिहास में पहली बार सामने आई ऐसी घटना। एमपी के नीमच में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ दहन के बीच फायर ब्रिगेड ने पानी डालकर बुझा दी आग। अब गोलमोल जवाब दे रहे जिम्मेदार। जानें पूरा मामला।

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Dussehra 2024

Dussehra 2024 : दशहरे के मौके पर देशभर में बुराई पर अच्छाई का प्रतीक मानकर रावण का पुतला दहन किया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच में रावण दहन के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसे इतिहास में पहली बार किसी ने नहीं देखा। यहां विजयदशमी पर लोगों ने अजीबो गरब घटना देखी। दशहरा उत्सव समिति द्वारा रावण मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया, वही पुतले पूरी तरीके से जले भी नहीं थे कि उस पर फायर ब्रिगेड ने पानी डालकर बुझा दिया।

इस मामले में जिम्मेदारों ने गोलमोल जवाब देते हुए आगजनी की संभावित घटना को लेकर पुतलों की आग बुझाने की बात कही है, जबकि दशहरा मैदान में दशकों से रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन होता आ रहा है और अब तक कभी भी आगजनी की कोई घटना सामने नहीं आई है। बावजूद इसके रावण मेघनाथ व कुम्भकरण के जलते पुतलों पर पानी डाल कर आग बुझाई गई है।

पुतलों की आग बुझाने आई फायर ब्रिगेड

परम्परा के अनुसार, दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दिवस माना जाता है, इसी के चलते इस दिन रावण, मेघनाथ और कुम्भकरण के पुतले का दहन किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पुतलों के जलने के बाद दहन देखने आए लोग उसकी राख शुभ मानते हुए अपने साथ रखककर घर ले जाते हैं। इस राख को साल भर लाल कपड़े में बांधकर लोग अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और घरों में रखते हैं। इसे सालभर रखने के बाद अगले रावण दहन तक रखते हैं। नई राख मिलने पर पुरानी वाली को जल में विसर्जित कर देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर-दुकान में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नही होता। लेकिन, शनिवार को हुए रावण दहन के बाद लोगों को उसकी राख भी नसीब नहीं हो सकी।

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जिम्मेदारों ने दी सफाई

इस मामले में दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष हेमंत सिंहल ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि रावण दहन के बाद पुतलों को ठंडा करने की परंपरा रही है। दशहरा मैदान में 20 हजार से अधिक पब्लिक होने के कारण कहीं कोई घटना ना हो, इसे लेकर पुतलों पर लगी आग बुझाई गई है। उन्होंने ये भी कहा कि आग लगने के बाद पुतले पूरी तरह से जल चुके थे।