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लकड़ी के पैसे नहीं थे, तो टायर और कचरे से जलानी पड़ी पत्नी की चिता

जिले के रतनगढ़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक और घटना प्रकाश में आई है। इस परिवार के पास लकड़ी खरीदने तक के पैसे नहीं होने के कारण टायर और बाढ़ में बहकर आए प्लास्टिक के कचरे की चिता बनाकर जलाना पड़ी।

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Manish Geete

Sep 05, 2016

cremate wife

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नीमच। जिले के रतनगढ़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक और घटना प्रकाश में आई है। इस परिवार के पास लकड़ी खरीदने तक के पैसे नहीं होने के कारण टायर और बाढ़ में बहकर आए प्लास्टिक के कचरे की चिता बनाकर जलाना पड़ी।


रतनगढ़ के निवासी जगदीश भील की पत्नी नौजी बाई की मृत्यु हो गई थी। जब वह अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान पहुंचे तो लकड़ी के लिए ढई हजार रुपए का बंदोबस्त नहीं हो पाया था। इस वजह से श्मशान घाट प्रबंधन ने लकड़ियां देने से मना कर दिया। वह बार-बार मिन्नते करता रहा, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। श्मशान के कर्मचारियों ने यहां तक कहा दिया कि पैसे नहीं है तो शव को दफना दो। इस पर वह शव को दफनाने के लिए फावड़ा लेकर आ गया। जगदीश भील गैती और फावड़े लेकर आ गया और दफनाने के लिए जगह ढंढने लगा। उसे दो गज जमीन भी नसीब नहीं हुई।


उधर, स्थानीय लोगों को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने नगर पालिका के दफ्तर जाकर गरीब भील की मदद करने के लिए निवेदन किया। नगर पालिका की ओर से जब एक वाहन लकड़ियां लेकर पहुंचा तो वह बीच रास्ते में ही खराब हो गया। इसके बाद वाहन चालक लकड़ियों को बीच में ही छोड़कर चलता बना। अंतिम संस्कार के लिए आए सभी लोगों को इंतजार करते हुए काफी समय हो गया। मजबूरी में जगदीश भील ने फटे-पुराने टायरों और कचरे को एकत्र किया। प्लास्टिक का यह कचरा हाल ही में बाढ़ में बहकर नदी किनारे जमा हो गया था। एक-एक करके सभी ने कचरा एकत्र किया और अंतिम संस्कार किया।

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