रतनगढ़ के निवासी जगदीश भील की पत्नी नौजी बाई की मृत्यु हो गई थी। जब वह अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान पहुंचे तो लकड़ी के लिए ढई हजार रुपए का बंदोबस्त नहीं हो पाया था। इस वजह से श्मशान घाट प्रबंधन ने लकड़ियां देने से मना कर दिया। वह बार-बार मिन्नते करता रहा, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। श्मशान के कर्मचारियों ने यहां तक कहा दिया कि पैसे नहीं है तो शव को दफना दो। इस पर वह शव को दफनाने के लिए फावड़ा लेकर आ गया। जगदीश भील गैती और फावड़े लेकर आ गया और दफनाने के लिए जगह ढंढने लगा। उसे दो गज जमीन भी नसीब नहीं हुई।