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मलबे में तब्दील हुआ नयागांव का गौरव, धमाके से धूल और मलबा बना CCI प्लांट की विशालकाय इमारत

MP News : नयागांव का गौरव मलबे में तब्दील हो गया। गगनचुंबी प्री-हीटर टावर को ब्लास्ट कर जमीदोज किया गया। 537 हेक्टेयर में फैले CCI प्लांट का वजूद खत्म हुआ।

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मलबे में तब्दील हुई CCI प्लांट की विशालकाय इमारत (Photo Source- Input)

जावद से कमलेश सारडा की रिपोर्ट

MP News :मध्य प्रदेश के नीमच जिले की औद्योगिक प्रगति की पहचान रहा नयागांव स्थित 'सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (CCI) का प्लांट अब सिर्फ इतिहास के पन्नों पर सिमट कर रह गया है। प्लांट को पूरी तरह से डिस्मेंटल (नष्ट) करने की प्रक्रिया के तहत, इसकी मुख्य पहचान रहे गगनचुंबी 'प्री-हीटर टावर' को नियंत्रित ब्लास्ट कर जमींदोज किया गया है। चंद सेकंड के इस भीषण धमाके ने उस विशालकाय ढांचे को मलबे और धूल के गुबार में तब्दील कर दिया, जिसके साए में कभी हजारों परिवारों का रोजगार फलता-फूलता था।

इस टावर के ढहने के साथ इलाके के इस इकलौते विशालकाय सरकारी उपक्रम का भौतिक वजूद भी हमेशा के लिए मिट गया है। आधिकारिक दस्तावेजों से मिली जानकारी के आधार पर इस विशाल प्लांट के स्थापना से लेकर इसके पतन तक की पूरी कहानी हम प्रस्तुत कर रहे हैं।

537 हेक्टेयर से अधिक में फैला था साम्राज्य

नीमच से 18 कि.मी दूर और जावद रोड रेलवे स्टेशन से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये प्लांट कोई छोटी-मोटी इकाई नहीं थी। इसका कुल क्षेत्रफल 537.606 हेक्टेयर था। इसमें से मुख्य प्लांट 32. 250 हेक्टेयर में स्थापित था। कच्चे माल के लिए इसका माइनिंग (खनन) क्षेत्र सबसे विशाल 450.042 हेक्टेयर में फैला हुआ था। इसके अलावा 18.160 हेक्टेयर में कर्मचारियों के लिए एक भव्य टाउनशिप (कॉलोनी) बसाई गई थी, जिसमें 575 आवासीय मकान, हेल्थ सेंटर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बैंक, पोस्ट ऑफिस और टेलीफोन एक्सचेंज जैसी तमाम आधुनिक सुख-सुविधाएं मौजूद थीं।

उत्पादन क्षमता और विस्तार का सुनहरा दौर

इस प्लांट में 01 मार्च 1982 को 1200 टीपीडी (टन रोजाना) क्षमता के साथ पहली बार उत्पादन शुरू हुआ था। इसके बाद 01 मई 1990 को इसका विस्तार करते हुए एक नई क्लिंकराइजेशन यूनिट स्थापित की गई। 'ड्राई प्रोसेस' तकनीक पर आधारित इस प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 4 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 10 लाख मीट्रिक टन क्लिंकर थी। यहां उच्च गुणवत्ता वाला ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट और पॉज़ोलाना पोर्टलैंड सीमेंट तैयार किया जाता था।

आर्थिक संकट और 'ब्लैकआउट' ने लगा दिया हमेशा के लिए ताला

इतने विशाल ढांचे, खुद की खदानों और बेहतरीन उत्पादन क्षमता के बावजूद, यह सरकारी उपक्रम कुप्रबंधन और 'वित्तीय तरलता की कमी' का गंभीर शिकार हो गया। कंपनी के पास काम चलाने के लिए नकदी का संकट खड़ा हो गया। अंततः पैसों की इसी भारी कमी के कारण बिजली का बिल जमा नहीं हो सका और 30 जून 1997 को बिजली विभाग ने प्लांट का पावर सप्लाई (बिजली कनेक्शन) काट दिया। इसी दिन इस प्लांट की मशीनों ने काम करना बंद कर दिया और इसमें हमेशा के लिए ताला लग गया।

एक युग का अंत

दशकों तक सुनसान और वीरान पड़े रहने के बाद, अब इस नीलाम हो चुके ढांचे को पूरी तरह से डिस्मेंटल किया जा रहा है। आसमान को छूने वाले उस प्री-हीटर टावर का बारूदी धमाकों के साथ गिरना नयागांव वासियों के लिए सिर्फ एक पुरानी इमारत का ढहना नहीं है, बल्कि यह एक पूरे औद्योगिक युग और उस उम्मीद का हमेशा के लिए खाक में मिल जाना है जिसे वे सालों से अपने सीने में संजोए बैठे थे।