24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘1 गाय-1 भैंस’ पालकर खोला डेयरी बिजनेस, नीमच में 26 साल के लड़के ने कमाए ’30 लाख’

Dairy business: कमल बताते कि शुरुआती दौर में परिवार के कुछ सदस्यों ने निर्णय का विरोध किया, लेकिन मैं पीछे नहीं हटा। मैनें इसी काम को करने की ठानी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नीमच

•

image

Astha Awasthi

•

Updated: 18 Jun 2026, 2:10 PM IST

Young farmer Kamal Rawat: दूध डेयरी पर मिली काम करने की प्रेरणा (Photo Source - Patrika)

Young farmer Kamal Rawat: दूध डेयरी पर मिली काम करने की प्रेरणा (Photo Source - Patrika)

Young farmer Kamal Rawat: मध्यप्रदेश में नीमच के गांव हनुमंतिया में रहने वाले 26 वर्षीय कमल रावत की मिसाल पेश की गई। उन्होंने बीए की पढ़ाई के साथ एक गाय और एक भैंस से डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। अब उनके फार्म पर 11 गायें, 5 भैंसें तथा अन्य बछिया हैं और वे प्रतिदिन लगभग 1.20 क्विंटल दूध का उत्पादन कर रहे हैं।

कमल रावत बताते हैं कि इस काम को करने की प्रेरणा उन्हें एक दूध डेयरी पर मिली। वे वहीं पर काम करते थे। दूध डेयरी पर काम करते हुए महसूस किया कि यदि वही मेहनत स्वयं के व्यवसाय में की जाए तो बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसी विचार के साथ डेयरी फार्म स्थापित करने का निर्णय लिया।

पूरा परिवार मिलकर करते हैं ये काम

कमल बताते कि शुरुआती दौर में परिवार के कुछ सदस्यों ने निर्णय का विरोध किया, लेकिन मैं पीछे नहीं हटा। मैनें इसी काम को करने की ठानी। बाद में जब डेयरी से सकारात्मक परिणाम मिलने लगे तो परिवार का भरोसा बढ़ता गया। आज पूरा परिवार इस कार्य में सहयोग कर रहा है। पूरी परिवार मिलकर इस काम को कर रहा है। खास यह है कि कमल ने डेयरी व्यवसाय के विस्तार के लिए न तो किसी सरकारी योजना का लाभ लिया और न ही कोई ऋण लिया। अपनी क्षमता के मुताबिक आय को लगाकर और सतत परिश्रम के बल पर ही उन्होंने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

उत्पादों से बढ़ाई स्वयं की आय

रावत ने अब तक लगभग 14 लाख रुपए का निवेश कर डेयरी व्यवसाय को विकसित किया है। खर्चों के बावजूद उन्होंने सात वर्ष में लगभग 30 लाख की आय अर्जित कर सफल डेयरी मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि दूध से बनने वाला घी, मावा, दही, छाछ सहित अन्य उत्पाद गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया। शुद्धता के कारण लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। वे अब इस काम को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। इस काम में मेहनत बहुत लगती है लेकिन इसका रिस्पॉन्स भी लोगों की वजह से बहुत अच्छा मिलता है।

खेती में करेंगे नवाचार

युवा किसान कमल रावत ने गोबर का उपयोग जैविक खाद बनाने में भी किया। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई। जैविक खेती को बढ़ावा मिला। 2025-26 में गोबर-जैविक खाद से लगभग 1.60 लाख रुपए अतिरिक्त कमाए। लगभग 2.5 बीघा क्षेत्र में फैले फार्म पर पशु शेड, भूसा भंडारण, बाड़ा और हरे चारे की समुचित व्यवस्था की गई है।