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55 KM तक बाढ़ में बहती रही 53 साल की हथिनी, मौत को मात देकर असम पहुंची; रेस्क्यू के बाद बची जान

नागालैंड में बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ में 53 साल की एक पालतू हथिनी करीब 55 किलोमीटर तक उफनती डिखो नदी में बहती रही।
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53 year old elephant flood journey assam

53 साल की हथिनी मौत को मात देकर असम पहुंची फोटो- TOI

पानी का तेज़ बहाव,चारों ओर तबाही और बीच धारा में अपनी जान बचाने की जंग लड़ती एक बेबस हथिनी करीब 55 किलोमीटर तक उफनती नदी के साथ बहती रही। हर पल मौत उसके सामने थी, लेकिन उसने हार नहीं मानी। आखिरकार, कई घंटों की इस दर्दनाक जद्दोजहद के बाद वह असम के शिवसागर जिले में किनारे तक पहुंच गई। यह सिर्फ एक हथिनी के बचने की कहानी नहीं, बल्कि जीवन की अदम्य जिजीविषा की मिसाल भी है।

53 वर्षीय यह पालतू हथिनी नागालैंड के नामसांग क्षेत्र की है। बादल फटने और कई दिनों तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने डिखो नदी को विकराल बना दिया। देखते ही देखते तेज़ बहाव ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। नदी उसे पहाड़ियों, चट्टानों और उफनती धाराओं के बीच करीब 55 किलोमीटर दूर असम के मैदानी इलाकों तक बहाकर ले गई।

उफनती नदी ने बहाया 55 किलोमीटर

गुरुवार को जब वह शिवसागर जिले के बिहुबोर में नदी किनारे वह पहुंची, तब उसका शरीर पूरी तरह थक चुका था। एक पैर घायल था और लंबी जंग की थकान साफ दिखाई दे रही थी। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए वह सिमालुगुरी के बालीघाट तक पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने उसे देखा और तुरंत प्रशासन को सूचना दी। बचाव दल और पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और हथिनी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। फिलहाल नज़ीरा पशु चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे हैं। उसके घायल पैर का इलाज किया जा रहा है और उसकी सेहत पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

बाढ़ के बीच उम्मीद की कहानी

शिवसागर में बाढ़ राहत कार्यों की निगरानी कर रहे राज्य मंत्री बिमल बोराह ने इसे बाढ़ के बीच राहत देने वाली खबर बताया। उन्होंने कहा कि नागालैंड से बहकर आई हथिनी को सुरक्षित बचा लिया गया है और पशु चिकित्सा टीमें लगातार उसकी देखभाल कर रही हैं। इस हथिनी का संघर्ष सिर्फ उसकी अपनी कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के दर्द का भी प्रतीक है, जो इस समय असम और नागालैंड में बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। जिस डिखो नदी ने कई टन वज़नी हथिनी को 55 किलोमीटर तक बहा दिया, उसी नदी ने अपने रास्ते में आने वाले गांवों की ज़िंदगी भी अस्त-व्यस्त कर दी है।

बाढ़ में भी जिंदा है उम्मीद

शिवसागर जिले के चोंटोक, बिहुबोर, नज़ीरा, सिमालुगुरी, झांजी और जामुगुरी सहित कई इलाके पानी में डूबे हुए हैं। डिखो, दिसांग और डोरिका नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हजारों परिवार अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इन हालात में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारतीय सेना की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। लेकिन इस भयावह बाढ़ के बीच 53 साल की इस हथिनी का बच जाना उम्मीद की एक ऐसी किरण बनकर सामने आया है, जिसने यह संदेश दिया है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, जीने की चाह सबसे बड़ी ताकत होती है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज़ कर दिया गया है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारतीय सेना की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं।

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