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हमारे अधिकारों की रक्षा करें…सुप्रीम कोर्ट में ‘आप’ ‌विधायक अमानतुल्लाह खान ने लगाई याचिका

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने याचिका लगाई है। इसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की रक्षा करते हुए विधेयक रद करने की मांग की है।

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Waqf Amendment Bill: हमारे अधिकारों की रक्षा करें…सुप्रीम कोर्ट में आप ‌विधायक अमानतुल्लाह खान ने लगाई याचिका

Waqf Amendment Bill: हमारे अधिकारों की रक्षा करें…सुप्रीम कोर्ट में आप ‌विधायक अमानतुल्लाह खान ने लगाई याचिका

Waqf Amendment Bill: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शनिवार को दाखिल की गई याचिका में उन्होंने इस विधेयक को मुसलमानों के धार्मिक, सांस्कृतिक और संस्थागत अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उल्लेखनीय है कि यह कदम उन्होंने ऐसे समय पर उठाया है जब एक दिन पहले ही AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी सुप्रीम कोर्ट में इसी विधेयक के खिलाफ याचिका दायर की थी।

यह विधेयक शुक्रवार को राज्यसभा में पारित हुआ। जबकि गुरुवार को इसे लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी थी। संसद के दोनों सदनों में इस पर लंबी चर्चा हुई। जो आधी रात के बाद तक कुल 12 घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान विभिन्न विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध किया और इसे अल्पसंख्यक अधिकारों के विरुद्ध करार दिया।

मुसलमानों के लिए ठीक नहीं है विधेयक

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने अपनी याचिका में कहा कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को सीमित करता है और कार्यपालिका को ऐसे अधिकार देता है जिससे वह धार्मिक संस्थानों में मनमाना हस्तक्षेप कर सके। इसके चलते न केवल अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी, बल्कि उनके धर्मार्थ कार्यों और संस्थाओं के संचालन का अधिकार भी कमजोर होगा।

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खान का कहना है कि वक्फ संपत्तियों और धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन समुदाय की आस्था से जुड़ा हुआ विषय है, जिसमें सरकार की मनमानी या प्रशासनिक दखल अनुचित है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस विधेयक की वैधता की समीक्षा करे और संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करे। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर कब और किस आधार पर सुनवाई करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील बन चुका है।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में 288 बनाम 232 और राज्यसभा में 128 बनाम 95 मतों से पारित किया गया। अब इसे लागू होने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है। इस बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी और किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत से इस विधेयक को रद्द करने की मांग की है। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को "असंवैधानिक" और "मुस्लिम विरोधी" करार दिया है।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 क्या है?

यह विधेयक वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करता है और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को बदलने का प्रस्ताव रखता है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के संचालन और प्रबंधन में व्याप्त समस्याओं को दूर करना है। विधेयक में नियमों को अधिक स्पष्ट बनाने, निर्णय प्रक्रिया में अधिक लोगों को शामिल करने और संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है। गौरतलब है कि वक्फ का अर्थ इस्लामी कानून के तहत उन संपत्तियों से है जो विशेष रूप से धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए समर्पित की जाती हैं।