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मोहन भागवत के Gen-Z वाले बयान पर अभिजीत दीपके का पलटवार, बोले- यही बात BJP और RSS को भी समझाएं

Mohan Bhagwat Gen Z Statement: मोहन भागवत के 'Gen-Z' बयान पर CJP नेता अभिजीत दीपके का तंज। बोले- आरएसएस प्रमुख अपनी यह बात पीएम मोदी और बीजेपी को भी समझाएं।
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Mohan Bhagwat Gen Z Statement

मोहन भागवत के Gen-Z वाले बयान पर अभिजीत दीपके का पलटवार, फोटो सोर्स- IANS

Abhijeet Dipke CJP Reaction: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा देश की नई पीढ़ी 'जेन-जी' और उनके विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरएसएस प्रमुख के इस बयान का स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा।

भागवत का संदेश बीजेपी और मोदी तक पहुंचे'

आरएसएस प्रमुख के द्वारा दिए गए बयान का जवाब देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि मोहन भागवत के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि हक की मांग या विरोध प्रदर्शन करने वाले 'जेन-जी' के युवाओं को 'राष्ट्रविरोधी' या 'देशविरोधी' का टैग नहीं दिया जाना चाहिए। चूंकि मोहन भागवत भारतीय जनतना पार्टी के लिए एक मार्गदर्शक (मेंटर) की भूमिका निभाते हैं, इसलिए मैं चाहता हूं कि वे यही संदेश सीधे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचाएं।

इतना ही नहीं दीपके ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भाजपा नेतृत्व अब आरएसएस प्रमुख की बात पर गंभीरता से ध्यान देगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह संभावना कम ही है कि भाजपा आरएसएस की अवहेलना करे। लेकिन अगर वे ऐसा करते हैं, तो फिर आरएसएस को भी इस बात पर आत्मचिंतन करना होगा कि भाजपा अब खुद मोहन भागवत के विचारों को भी नजरअंदाज कर रही है।

क्या कहा था मोहन भागवत ने?

गौरतलब है कि मुंबई में युवाओं के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छात्र आंदोलनों और नई पीढ़ी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि Gen-Z के युवा किसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उन्हें देशविरोधी कहना गलत है, क्योंकि वे देश की अगली पीढ़ी हैं। भागवत ने कहा कि आज की Gen-Z और Gen-Alpha पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और हर बात को तर्क के आधार पर समझना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन अपनी बात रखने का एक वैध और संवैधानिक तरीका है। युवाओं की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनकर सरकार को बातचीत के जरिए उनका समाधान निकालना चाहिए।