
हफ्तेभर बाद ट्रांसपोर्टर्स ने हड़ताल ली वापस, शनिवार को सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर करेंगे बैठक
नई दिल्ली। ट्रांसपोर्टर्स ने हफ्तेभर बाद शुक्रवार को हड़ताल वापस ले लिया है। ट्रांसपोर्टर्स ने यह हड़ताल सड़क और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद वापस लिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) और परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी किए गए संयुक्त बयान में कहा गया है कि विभिन्न मुद्दों पर शनिवार को चर्चा की जाएगी।
भारी वाहनों के लिए थर्ड़ पार्टी बीमा
आपको बता दें कि सरकार के आग्रह पर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) भारी वाहनों पर लगने वाले थर्ड पार्टी इन्श्यूरेंस के प्रीमियम पर विचार करने के लिए तैयार है। इसके लिए आईआरडीएआई ने शनिवार दोपहर एक बजे समय नियत किया है जिसमें ट्रांसपोर्टर्स के साथ मिलकर इस संबंध में चर्चा की जाएगी।
टोल कलेक्शन में आसानी
आपको बता दें कि ट्रांसपोर्टर्स की ओर से यह भी कहा गया है कि देशभर में कई जगहों पर टोल लिया जाता है। जहां पर काफी समय लगता है। इसके लिए ट्रक मालिकों को काफी नुकसान होता है। इस संबंध में कहा गया है कि टोल कलेक्शन को आसान बनाया जाए। इस संबंध में सरकार ने ट्रांसपोर्टर्स को आश्वासन दिया है कि अगले 6 महीने के अंदर तकनीकी व्यव्सथा की जाएगी जिससे ट्रक बिना देरी किए टोल जमा करते हुए आसानी से जा सकेंगे। बता दें कि इस संबंध में परिवहन मंत्रालय की एक कमिटी ऐसे संभावनाओं पर विचार कर रही है साथ ही ट्रांसपोर्टर्स की ओर से दिए गए सुझाव पर भी विचार कर रही है। इन सबके अलावे सरकार ने व्यवसायिक वाहनों में काम करने वाले ड्राइवर और उसके साथी को प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। आपको बता दें कि इसके अलावे कई अहम मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा है।
ये हैं ट्रक-बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें
- डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इसके अलावा सभी राज्यों में डीजल की दरें एक समान की जाएं।
- टोल कलेक्शन सिस्टम को बदला जाए। टोल के मौजूद सिस्टम से टोल प्लाजा पर ईंधन और समय का नुकसान होता है। इससे ट्रक ऑपरेटरों को हर साल 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है।
- थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम से जीएसटी को हटाया जाए। साथ ही इससे एजेंट को मिलने वाले अतिरिक्त कमीशन को भी खत्म किया जाए।
- इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AE में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए।
- ट्रक ऑपरेटरों को राहत देने के लिए ई-वे बिल में बदलाव किया जाए।
Published on:
27 Jul 2018 09:48 pm
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