
तृणमूल कांग्रेस में 28 साल की सबसे बड़ी बगावत
TMC Vertical Split West Bengal:पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टी अपने 28 साल के इतिहास में पहली बार आंतरिक संकट और विभाजन से घिर गई है। दरअसल, दिल्ली में हुई एक 'अचानक' मुलाकात ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा किया कि टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए विधानसभा में पार्टी के विधायी नेतृत्व पर अपना दावा ठोक दिया है। इसके साथ ही बंगाल की राजनीति पूरी तरह से पलट गई है।
इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 'बंगाल भवन' में एक मुलाकात हुई थी और उसी दौरान एक स्क्रिप्ट लिखी गई थी, जो पूरे सियासत को पलट कर रख दी। दरअसल, वहां, पर वर्तमान के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और टीएमसी के उलूबेरिया पूर्व से विधायक रीताब्रत बनर्जी के बीच एक मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बारे में खुद रीताब्रत बनर्जी ने बताया कि यह बेहद अनौपचारिक और महज कुछ मिनटों की एक रूटीन मुलाकात थी। शुरुआत में दोनों पक्षों ने इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के गहरे मायने निकाले जाने लगे। आखिरकार, मात्र 13 दिनों के भीतर इस संक्षिप्त मुलाकात ने एक सुनियोजित बगावत का रूप ले लिया और ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर की दरार खुलकर सामने आ गई।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस बगावत की जमीन 4 मई को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तैयार होने लगी थी। पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और असंतोष साफ दिखाई देने लगा था, जिसके कारण पार्टी की बैठकों में विधायकों की उपस्थिति लगातार घटने लगी थी। इस असंतोष की मुख्य वजह पार्टी के आंतरिक पावर स्ट्रक्चर (संगठनात्मक नियंत्रण) को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी थी। विशेष रूप से सांसद अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और पार्टी के भीतर चल रहे अन्य विवादों व आरोपों के कारण संगठन के अंदर तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका था, जिससे विधायकों में बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
दिल्ली की मुलाकात के बाद घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला। विधायक रीताब्रत बनर्जी इस संगठित विद्रोह का मुख्य चेहरा बनकर उभरे और उन्होंने TMC के 80 में से 60 विधायकों को अपने पाले में कर लिया। इस बागी गुट ने एकजुट होकर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को अपने हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपे। स्पीकर ने भी इस टूट को कानूनी रूप से स्वीकार करते हुए बागी गुट को मान्यता दे दी और विधानसभा में विपक्षी नेतृत्व के लिए जगह आवंटित कर दी। एक बेहद निर्णायक कदम उठाते हुए बागी विधायकों ने सर्वसम्मति से रीताब्रत बनर्जी को 'नेता प्रतिपक्ष' चुन लिया, जिसके बाद पार्टी का पुराना विधायी नेतृत्व ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
गौरतलब है कि साल 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल कांग्रेस की स्थापना किए जाने के बाद से यह पार्टी का पहला औपचारिक और सबसे बड़ा विभाजन है। विधानसभा में इस तख्तापलट के कुछ ही घंटों के भीतर, टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से 'क्राइसिस मोड' में आ गया है। स्थिति को नियंत्रण में लेने और बगावत को रोकने के एक हताश प्रयास के तहत पार्टी नेतृत्व ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल की सभी संगठनात्मक समितियों और फ्रंटल विंग्स (मोर्चों) को भंग कर दिया है। दिल्ली की एक छोटी सी मुलाकात से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब बंगाल की सत्ताधारी पार्टी में पूर्ण पैमाने पर राजनीतिक पुनर्गठन में बदल चुका है, जिसने पार्टी की गहरी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
Updated on:
04 Jun 2026 03:59 pm
Published on:
04 Jun 2026 03:49 pm
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