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दिल्ली विधानसभा में काली पट्टी बांधकर क्यों पहुंचे BJP विधायक? सदन में मचे बवाल की ये है असली वजह

Delhi Assembly Special Session: महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने के विरोध में दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया, जहां भाजपा विधायकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की घोषणा की।

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Photo Source- X @DelhiAssembly

Delhi Assembly Special Session: महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने का मुद्दा अब देश की राजधानी की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस विषय पर गहन चर्चा और विपक्ष की घेराबंदी के लिए दिल्ली विधानसभा में एक विशेष सत्र की शुरुआत हुई। सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जहां भाजपा ने विपक्षी दलों पर देश की महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने और उनके विश्वास को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है।

विधानसभा में विरोध और निंदा प्रस्ताव

दिल्ली विधानसभा के इस विशेष सत्र में भाजपा विधायक एक अलग ही अंदाज में नजर आए। सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए सभी भाजपा विधायक अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर पहुंचे, जो लोकसभा में आरक्षण बिल पास न होने के लिए उनके विरोध था। विधायकों ने नियम 280 के तहत अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाते समय भी इस पट्टी को नहीं हटाया। भाजपा का मुख्य उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा करना और विपक्ष के अड़ियल रुख के खिलाफ सदन में एक निंदा प्रस्ताव पारित करना है।

भाजपा विधायक विपक्ष पर हमलावर

इससे पहले भाजपा विधायक हरीश खुराना ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकार छीनने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल को रोककर विपक्ष ने महिलाओं के हक को खत्म करने का काम किया है। खुराना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा थी कि संसद की सीटें बढ़ाकर 850 करने के बाद 2029 में महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाए, लेकिन विपक्ष ने इस प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं कर रही है।

भाजपा विधायक के मुताबिक, इसी मुद्दे को लेकर आज विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें निंदा प्रस्ताव पेश किया जाएगा और उसे पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा देश की सभी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए काम करती रहेगी। दिल्ली सचिवालय अधिकारियों ने बताया कि महिला आरक्षण मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सत्र संभवतः एक दिन का होगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

शहीदों को श्रद्धांजलि और ऐतिहासिक महत्व

सदन की कार्यवाही में राजनीतिक चर्चा के अलावा मानवीय संवेदनाएं और गौरवशाली इतिहास भी देखने को मिला। विधायकों ने मशहूर गायिका आशा भोसले के निधन पर दुख जताया और प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए 75 हजार भारतीय सैनिकों को एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को याद दिलाया कि 108 साल पहले इसी ऐतिहासिक भवन में एक युद्ध सम्मेलन हुआ था, जिसमें महात्मा गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय सैनिकों ने निष्ठा के साथ युद्ध लड़ा, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने स्वराज के बदले देश को रॉलेक्ट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसे जख्म दिए।