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बार-बार एक ही गलती, इन्हें री-ट्रेनिंग पर भेजो…फैमिली कोर्ट के जज पर भड़का दिल्ली हाईकोर्ट

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध खत्म करने का आदेश पारित किया गया था। इसके साथ ही फैसला सुनाने वाले जज को ट्रेनिंग पर भेजने का आदेश दिया है।

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Delhi High Court lashes out Family Court judge in husband wife divorce in Delhi

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के जज पर जताई नाराजगी।

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दंपति के बीच तलाक के मामले पर सुनवाई करते हुए जहां फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया, वहीं फैमिली कोर्ट में फैसला सुनाने वाले जज को भी ट्रेनिंग की जरूरत बताई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज को आदेश दिया कि दंपति के बीच तलाक का फैसला सुनाने वाले जज को री-ट्रेनिंग के लिए भेजा जाए। दरअसल, पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने दंपति के बीच तलाक के फैसले में ऐसे कानूनी प्रावधानों को आधार बनाया था, जो कानून में मौजूद ही नहीं हैं।

बिना गवाही निपटाया गया तलाक का मामला

दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर मंगलवार को जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बेंच ने पाया कि दंपति के बीच तलाक का मामला बिना किसी पक्ष की गवाही दर्ज किए निपटा दिया गया। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा "यह पहली बार नहीं है, जब फैमिली कोर्ट के जज ने बिना गवाही और कानूनी प्रावधानों के दंपति के बीच तलाक का फैसला सुनाया। केसों की भीड़ चाहे जितनी हो, लेकिन कानून के प्रावधानों को बदला और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"

2021 में दायर हुई थी तलाक याचिका

दरअसल, इस मामले में दंपति ने साल 2021 में हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (ia) यानी क्रूरता के तहत तलाक याचिका दायर की थी। दंपति कई राज्यों में अलग-अलग मामलों में उलझे थे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को सुनवाई के लिए दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था। ताकि दंपति के जितने भी मामले हैं, उनकी एक ही जगह पर सुनवाई हो सके। इस बीच पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने पहली तारीख में ही गवाहियों का अधिकार खत्म करते हुए बिना किसी साक्ष्य के दंपति के बीच तलाक का फैसला सुना दिया। इस दौरान अदालत ने स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 28A का जिक्र किया, जो अब कानून के अस्तित्व में ही नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। ऐसा कई बार हो चुका है, जब इन्हीं जज ने इसी तरह के मामलों में कई गलतियां की हैं। हिन्दू विवाह को पवित्र बंधन और स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुए विवाह का महत्व कम बताना अनुचित और अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई शादी उतनी ही मान्य, सम्मानित और गंभीर है, जितनी हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत शादी पवित्र बंधन मानी जाती है।

जज को री-ट्रेनिंग पर भेजने के आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच पटियाला फैमिली कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए फैसला निरस्त कर दिया। इसके साथ ही इस पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया है। अब यह मामला पटियाला हाउस स्थित फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज की अदालत में चलेगा। इसमें दोनों पक्ष अपनी मौखिक और दस्तावेजी गवाही पेश करेंगे। इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी को इस फैसले से संबंधित फैमिली कोर्ट के जज को विवाह संबंधी कानूनों के लिए री-ट्रेनिंग पर भेजने का आदेश दिया।


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