
दिल्ली हाईकोर्ट में यासीन मलिक आतंकी फंडिंग मामले पर सुनवाई।
Yasin Malik Terror Funding Case:राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के मामले की सुनवाई खुली अदालत में न की जाए। यह मामला 2016 के आतंकी फंडिंग से जुड़ा है, जिसमें यासीन को उम्रकैद की सजा मिली है। एनआईए चाहती है कि इस सजा को मौत की सजा में बदला जाए। हालांकि इसपर स्पेशल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेर’ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मौत की सजा उचित नहीं होगी। अदालत ने यह भी माना कि मलिक का गांधीवादी अहिंसा के मार्ग पर चलने का दावा वास्तविक नहीं था।
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को NIA ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक से जुड़े आतंकी फंडिंग मामले की सुनवाई को ओपन कोर्ट में नहीं करने का अनुरोध किया। एनआईए के विशेष लोक अभियोजक अक्षै मलिक ने यह आग्रह जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ के समक्ष किया। एजेंसी ने कहा कि यासीन मलिक के खिलाफ मौत की सजा की मांग वाली अपील की सुनवाई ऐसे लिंक के जरिए की जाए जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो, ताकि कार्यवाही ओपन कोर्ट में न हो। अदालत ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार करेगी और इस पर बाद में निर्णय सुनाएगी।
वर्तमान में यासीन मलिक तिहाड़ जेल में बंद हैं और उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खुद अपनी बात अदालत के सामने रखी। एनआईए की ओर से अदालत को बताया गया कि मलिक ने एजेंसी की अपील के खिलाफ विस्तृत जवाब दाखिल किया है, जिसे एजेंसी अभी अध्ययन कर रही है। इसके लिए उसे कुछ समय चाहिए। इसके विपरीत मलिक ने कहा कि यह मामला तीन साल से लंबित है, इसलिए अदालत को जल्द से जल्द इस पर सुनवाई करनी चाहिए। खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तारीख 28 जनवरी 2026 तय की।
लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई के दौरान यासीन मलिक ने अदालत में कहा कि 1990 से अब तक उन्होंने छह अलग-अलग केंद्र सरकारों के साथ कामकाजी संबंध रखे हैं। उन्होंने बताया कि वह वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, पी.वी. नरसिंहा राव, एच.डी. देवगौड़ा, आई.के. गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के दौर में सरकार के संपर्क में रहे। मलिक ने कहा कि उन्हें कई बार कश्मीर मुद्दे, क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और शांति से जुड़े संवादों में शामिल किया गया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के दृष्टिकोण को रखने के लिए प्रेरित किया गया।
यासीन मलिक को मई 2022 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने मामले में दोष स्वीकार कर लिया था और आरोपों का विरोध नहीं किया था। इसके पहले मार्च 2022 में अदालत ने यासीन मलिक के साथ कई अन्य व्यक्तियों पर यूएपीए (UAPA) के तहत आरोप तय किए थे। इनमें हाफ़िज मुहम्मद सईद, शब्बीर अहमद शाह, हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सलाउद्दीन, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद शाह वटाली, शाहिद-उल-इस्लाम, अल्ताफ अहमद शाह (फंतूश), नैय्यिम खान और फारूक अहमद डार (बित्तू कराटे) शामिल थे। वहीं, अदालत ने कमरान यूसुफ, जावेद अहमद भट्ट और सैयदा आसिया अंद्राबी को आरोपमुक्त कर दिया था।
Published on:
10 Nov 2025 04:08 pm
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