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छह साल में मेहनत से खड़ा किया था सपनों का घर, अब पसरा सन्नाटा; दिल्ली मालवीयनगर अग्निकांड में खत्म हुईं एक साथ तीन पीढ़ियां

Delhi Hotel Fire में कई परिवार उजड़ गए। इस हादसे में विवेक अग्रवाल के परिवार के आठ लोगों की एक साथ जान चली गई। इसके बाद घर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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Flourish Stay Hotel Fire

दिल्ली अग्निकांड में एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत के बाद घर में पसरा सन्नाटा (Photo-IANS)

Flourish Stay Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के फ्लोरिश स्टे होटल में 3 जून को भीषण आग लगी थी, जिसमें मौके पर ही 21 लोगों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे में कई परिवार उजड़ गए। इसमें एक परिवार ऐसा भी था जिसकी तीन पीढ़ियां एक साथ आग की भेंट चढ़ गईं। जानकारी के अनुसार परिवार अपने घर के बुजुर्ग राधेश्याम अग्रवाल के इलाज के लिए दिल्ली आए थे और अस्पताल के पास वाले होटल में रुके थे। दरअसल, 31 मई को साकेत के मैक्स अस्पताल से राधेश्याम के बेटे विवेक अग्रवाल के पास फोन गया था कि उनके पिता की तबीयत बहुत नाजुक है।

फोन आने के बाद बेटी को बेंगलुरु से बुलाया

डॉक्टरों से पिता की गंभीर हालत की जानकारी मिलने के बाद विवेक अग्रवाल ने अपनी बड़ी बेटी जिविशा को बेंगलुरु से दिल्ली बुला लिया। जिविशा हाल ही में PES यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने गई थी। परिवार चाहता था कि इस मुश्किल समय में सभी लोग एक-दूसरे के साथ रहें। 2 जून को जिविशा दिल्ली पहुंची और पूरा परिवार अस्पताल के पास रुक गया।

आग ने ली एक ही परिवार के आठ लोगों की जान

दिल्ली मालवीयनगर अग्निकांड में इस परिवार के एक साथ आठ लोगों की जान चली गई थी। इस आग ने विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजनी, बेटियां जिविशा और वार्या, मां प्रेमलता और राजस्थान से आए तीन रिश्तेदारों की जान ली। इसके बाद भी अस्पताल में भर्ती राधेश्याम को इस घटना के बारे में नहीं बतया गया था। परिजनों ने सोचा था कि उनकी हालत में सुधार आने के बाद उन्हें बताएंगे लेकिन 9 जून को राधेश्याम की भी मौत हो गई।

अजमेर से दिल्ली आया था परिवार

राधेश्याम अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रेमलता 1978 में अजमेर से दिल्ली आए थे। शुरुआत में वे दक्षिण दिल्ली के कोटला मुबारकपुर इलाके में रहते थे। राधेश्याम ने परिवार के ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स कारोबार को आगे बढ़ाया और बाद में रियल एस्टेट व इंटीरियर डेकोरेशन के क्षेत्र में भी काम किया। रिश्तेदारों का कहना है कि उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की और अपने परिवार को बेहतर भविष्य दिया।

छह साल में तैयार हुआ था सपनों का घर

गुरुग्राम के सेक्टर-46 में बना तीन मंजिला आलीशान घर इस परिवार की सालों की मेहनत का नतीजा था। विवेक ने 2015 में जमीन खरीदी थी और बाद में उसे अपने सपनों के घर में बदलने का फैसला किया। घर को बनने में करीब छह साल लगे। दिल की बीमारी से जूझने के बावजूद राधेश्याम खुद साइट पर बैठकर काम देखते थे। दिसंबर 2025 में परिवार इस घर में शिफ्ट हुआ और गृह प्रवेश का बड़ा प्रोग्राम भी किया गया था। गुरुग्राम का वह नया घर आज भी खड़ा है, लेकिन उसके कमरों में अब सन्नाटा पसरा है। जिन दीवारों ने परिवार की खुशियां देखी थीं, वहां अब सिर्फ यादें बची हैं।

कम उम्र में CA बना विवेक

राधेश्याम के बेटे विवेक अग्रवाल बचपन से पढ़ाई में तेज थे। उन्होंने दिल्ली से पढ़ाई पूरी करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा पास की और कम उम्र में ही अपनी पहचान बना ली। ओमान, सिंगापुर और नाइजीरिया में काम करने के बाद वे भारत लौटे और कई बड़ी कंपनियों में जिम्मेदारियां संभालीं। एयरटेल, जेनपैक्ट, एचसीएल और इंफो एज जैसी कंपनियों में काम करने के बाद वह इंश्योरेंसदेखो में सीएफओ बने।

विवेक की बेटियां भी थी होनहार

विवेक और उनकी पत्नी तरजनी अपनी दोनों बेटियों पर गर्व करते थे। बड़ी बेटी जिविशा ने बेंगलुरु की जानी-मानी यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था और छोटी बेटी वार्या गुरुग्राम के स्कूल में पढ़ाई कर रही थी। दोनों बहनें आगे विदेश में पढ़ाई करने के सपने देख रही थीं। वार्या हाल ही में छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत जर्मनी से लौटी थी। परिवार को उम्मीद थी कि आने वाले सालों में दोनों बेटियां नई ऊंचाइयों को छुएंगी।

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