आपको बता दें कि पहली बार जारी किए गए इस तरह की रैंकिंग का पैमाना चार श्रेणियों के आधार पर तय किया गया है। इसमें संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक और भौतिक के कुल 15 श्रेणियां और 78 ***** थे। सभी 78 सूचकों के लिए 100 अंक थे। संस्थागत और सामाजिक श्रेणी के लिए 25-25 अंक थे। भौतिक परिस्थितियों के लिए अधिकतम 45 अंक थे। बाकी पांच अंक आर्थिक पैमाने के लिए थे। यदि रोजगार देने की बात करें तो दिल्ली पूरी तरह से असफल रही है। जबकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में 25 अंक भी हासिल नहीं कर पाई। बता दें कि केजरीवाल सरकार लगातार यह कहती रही है कि उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है और आजादी के बाद से यह पहली ऐसी सरकार है जिन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में इतना काम किया है। लेकिन ताजा आंकड़े केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोल रही है। ठीक इसी तरह से शिक्षा के क्षेत्र में भी अतुलनीय काम करने के बारे में दिल्ली सरकार कहती रहती है लेकिन इस रैंकिंग में शिक्षा के क्षेत्र में भी दिल्ली को बमुश्किल 50 फीसद अंक ही प्राप्त हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में केजरीवाल सरकार द्वारा किए गए काम के दावों की भी पोल खुल रही है। वायु प्रदूषण करने के प्रयासों के मामले में दिल्ली को महज 20 अंक मिले तो वहीं बिजली आपूर्ति की श्रेणी में दिल्ली को 20 फीसद अंक मिले हैं। पेयजल आपूर्ति के मामले में 45 फीसद के आसपास अंक मिले हैं।