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Delhi Lucknow Fire: दिल्ली में 23, लखनऊ में 15 मौतें; गर्मी में क्यों बढ़ जाता है शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा?

Delhi lucknow fire short circuit risk:मई 2024 की भीषण गर्मी के दौरान दिल्ली और लखनऊ में शॉर्ट सर्किट से लगी आग की घटनाओं में कई लोगों की जान गई। गर्मी बढ़ने के साथ आग से जुड़ी इमरजेंसी कॉल 9,000 से अधिक पहुंच गईं और अधिकांश मामलों में कारण बिजली की खराबी बताया गया।

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Short Circuit Fire: दिल्ली के मालवीय नगर के पास हौज रानी इलाके में आग लगने से 23 लोगों की मौत हो गई थी। इसके कुछ हफ्ते बाद ही लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की खबर सामने आ गई और फिर से आग में 15 लोगों की जानें चली गई। माना जा रहा है कि दोनों ही आग बिजली की खराबी की वजह से लगी थीं। एक पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, मई 2024 के आखिर में बहुत गर्म दिन था। दिल्ली फायर सर्विस को 220 इमरजेंसी कॉल, जो उस साल का सबसे व्यस्त दिन था। अधिकारियों ने उस समय कहा था कि जिन घटनाओं में वे मदद के लिए पहुंचे, उनमें से लगभग 70% आग बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थीं। उस पूरी गर्मी के दौरान, आग से जुड़ी इमरजेंसी कॉल पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा होकर 9,000 के पार पहुंच गईं, और मरने वालों की संख्या पिछले साल इन्हीं महीनों में दर्ज 10 मौतों के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हो गई।

2024 बना दुनिया का सबसे गर्म साल

उस गर्मी में दिल्ली के कुछ इलाकों में तापमान 50°C के करीब पहुंच गया था, और बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि 2024 दुनिया के इतिहास का सबसे गर्म साल रहा। वह साल बहुत मुश्किल भरा था, लेकिन उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में हीटवेव (लू) अब आम बात हो गई है। हर गर्मी में इस इलाके में जानलेवा आग का वही दुखद चक्र देखने को मिलता है, जिसकी वजह शॉर्ट सर्किट, बिजली की खराबी और एयर कंडीशनर को माना जाता है।

दिल्ली में 23 वहीं लखनऊ में हुई 15 मौतें

इस साल 3 जून को मालवीय नगर के हौज रानी में एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट सुविधा में लगी आग में 23 लोगों की जान चली गई, जिनमें इलाज के लिए दिल्ली आए विदेशी नागरिक भी शामिल थे। एक महीने से भी कम समय बाद 22 जून को, लखनऊ के अलीगंज में एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज्यादातर युवा थे। दोनों ही घटनाओं में, फायर अधिकारियों को शक है कि आग लगने की एक वजह शॉर्ट सर्किट थी। इसके बाद आग उन इमारतों में तेजी से फैल गई जो बिल्डिंग और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रही थीं और जिनमें हवा आने-जाने और इमरजेंसी निकास की सही व्यवस्था नहीं थी। हालांकि आग लगने की पक्की वजह जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगी, लेकिन ये घटनाएं कई सवाल खड़े करती हैं।

शॉर्ट सर्किट क्या है?

शॉर्ट सर्किट तब होता है जब बिजली को अचानक बहुत कम रुकावट वाला कोई गलत रास्ता मिल जाता है। ऐसे में करंट अपने सामान्य रास्ते की बजाय उसी आसान रास्ते से तेजी से बहने लगता है, जिससे तार बहुत गर्म हो सकते हैं, चिंगारियां निकल सकती हैं और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसी खतरे से बचाने के लिए घरों में फ्यूज या MCB लगाए जाते हैं, जो ज्यादा करंट आते ही बिजली की सप्लाई बंद कर देते हैं।

अचानक गर्मी से लगती है आग

कई बार बिजली की आग शॉर्ट सर्किट से नहीं लगती है, अचानक पैदा हुई गर्मी से लगती है। इसकी वजह अक्सर कोई ढीला कनेक्शन या जरूरत से पतला तार होता है। ऐसी जगहों पर रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिससे लगातार थोड़ी-थोड़ी गर्मी बनती रहती है। यह गर्मी इतनी नहीं होती कि MCB या ब्रेकर ट्रिप हो जाए, इसलिए समस्या नजर नहीं आती। लेकिन समय के साथ वही जगह बहुत ज्यादा गर्म होकर आसपास की चीजों में आग लगा सकती है।

ढीले जोड़ कैसे खतरा बनते हैं?

खतरा अक्सर वहां होता है जहां तार आपस में जुड़े होते हैं या स्विच, प्लग और सॉकेट में लगे होते हैं। गर्मी की वजह से ये जोड़ धीरे-धीरे ढीले पड़ सकते हैं। जब तारों के बीच थोड़ा सा गैप बन जाता है, तो बिजली उस गैप को पार करते समय चिंगारी पैदा करती है। ये चिंगारियां और ज्यादा गर्मी बनाती हैं, जिससे जोड़ और खराब होता जाता है। फिर ज्यादा चिंगारियां निकलती हैं और यह सिलसिला चलता रहता है, जिससे आखिरकार आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

बढ़ती गर्मी से बिजली के तारों पर बढ़ता खतरा

गर्मी के मौसम में बिजली के तारों पर ज्यादा दबाव पड़ता है। हर तार की एक सीमा होती है कि वह कितनी बिजली सुरक्षित तरीके से ले जा सकता है। तार काम करते समय गर्म होता है और अपनी गर्मी आसपास की हवा में छोड़कर ठंडा रहता है। लेकिन जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा, जैसे 45°C के आसपास या उससे ऊपर हो जाता है, तो तार की गर्मी आसानी से बाहर नहीं निकल पाती। ऐसे में वह सामान्य काम करते हुए भी जरूरत से ज्यादा गर्म हो सकता है। समस्या यह है कि भारत में कई बिजली के उपकरण और वायरिंग ऐसे तापमान को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जब सामान्य वातावरण लगभग 33°C माना जाता था। अब गर्मियों में तापमान अक्सर इससे काफी ऊपर चला जाता है। जिसका असर ये होता है कि तारों की बिजली ढोने की क्षमता कम हो जाती है, ज्यादा गर्म होने लगते हैं, उनका इन्सुलेशन खराब हो सकता है और शॉर्ट सर्किट या आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

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