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21 मौतें, 50-60 मोबाइल और 30 पासपोर्ट, भट्टी जैसे तपते कमरे थे कमरे; दिल्ली में बिना लाइसेंस के घरों में बना दिए होटल

Delhi malviya nagar: दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी अचानक आग में कुल 21 लोगों के मौत की पुष्टि हुई थी। जांच में चला कि इनमें से ज्यादातर जाने जलने से नहीं बल्कि आग के धुंए से दम घुटने के कारण हुई है।
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नई दिल्ली

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Pooja Gite

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Updated: 4 Jun 2026, 6:46 PM IST

delhi malviya nagar hotel fire

PHOTO IANS

Delhi malviya nagar: देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए भयानक अग्निकांड ने सबका दिल दहला दिया है। इस हादसे में 21 लोगों की जान चली गई। जांच एजेंसी ANI के मुताबिक, आग इतनी तेज थी कि दमकल विभाग के आग को बुझने के घंटों बाद तक भी होटल के कमरे कोयले की भट्टी की तरह तप रहे थे। पुलिस की पड़ताल के दौरान होटल रूम से 50-60 मोबाइल और करीब 30 पासपोर्ट मिले हैं। सुरक्षा को नजरदांज करते हुए घरों को लाइसेंस के बिना ही होटल बना दिया गया। सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही देखने को मिली है, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं और ऐसे होटलों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा रहा है।

दम घुटने से हुई ज्यादातर मौतें

पुलिस और जांच टीमों के मुताबिक, मरने वाले लोगों के शरीर पर जलने के निशान बहुत कम हैं। शुरुआती जांच कहती है कि होटल में धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला और दम घुटने की वजह से उनकी मौत हो गई। अभी तक सिर्फ 5 शवों की पहचान हो पाई है, बाकी लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

इलाज कराने भारत आए थे विदेशी मेहमान

इस होटल में ज्यादातर विदेशी नागरिक ठहरे हुए थे, जो मेडिकल वीजा पर भारत में अपना इलाज कराने आए थे। बताया जा रहा है कि इस गेस्ट हाउस में हर महीने करीब 80 विदेशी मेहमान रुकते थे। पुलिस और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के रिकॉर्ड में इन सभी विदेशी मेहमानों की जानकारी C-Form के जरिए दर्ज थी।

सील खिड़कियां और बंद दरवाजे

जांच में सामने आया है कि होटल के अंदर सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं, जो इस दर्दनाक हादसे की सबसे बड़ी वजह बनी। बिल्डिंग की सभी खिड़कियां और कांच के पैनल चारों तरफ से पूरी तरह सील थे। इसका नतीजा यह हुआ कि जब आग लगी, तो दम घोटने वाला धुआं बाहर ही नहीं निकल पाया और लोग अंदर तड़पते रहे। रही-सही कसर बेसमेंट के लॉक दरवाजे और रास्ते में लगी ढाई फीट ऊंची लोहे की जाली ने पूरी कर दी। रेस्क्यू टीम को सिर्फ इस दरवाजे को खोलने और लोहे की जाली को काटने में ही 20 मिनट बर्बाद करने पड़े। हालांकि, बाद में टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए बेसमेंट से 6-7 लोगों को सही-सलामत बाहर निकाल लिया।

सुरक्षा में भयंकर लापरवाही

इस पूरी बिल्डिंग में सबसे चौंकाने वाली बात यह मिली कि सुरक्षा के नाम पर यहां कोई इंतजाम नहीं थे। पूरी इमारत में हवा आने-जाने का कोई रास्ता ही नहीं था, जिससे धुआं या गैस बाहर नहीं निकल सके। हद तो तब हो गई जब जांच में पता चला कि आपातकालीन स्थिति में जान बचाकर भागने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं बनाया गया था। जब आग फैली, तो लोगों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं बचा और वे अंदर ही फंसकर रह गए।