
Sansad Chalo March : दिल्ली पुलिस की जांच में कथित चैट पर फोकस, हिंसा से जुड़े हर डिजिटल सुराग की पड़ताल (फोटो सोर्स: ANI)
CJP Sansad Chalo Protest: राजधानी दिल्ली के संसद मार्ग पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान भड़की हिंसा ने सुरक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है। इस उपद्रव में 118 पुलिसकर्मी और करीब 70 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि 15 से 20 सरकारी वाहनों को आग और तोड़फोड़ के हवाले कर दिया गया। लेकिन अब इस मामले में जो डिजिटल सुराग सामने आ रहे हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई अचानक भड़का गुस्सा नहीं, बल्कि बेहद सोच-समझकर तैयार किया गया एक खतरनाक प्लान था।
दिल्ली पुलिस के हाथ कुछ ऐसी सनसनीखेज चैट लगी हैं, जिनमें न केवल 'कुर्बानी' देने और सरकार को झुकाने की बातें लिखी हैं, बल्कि प्रशासन द्वारा इंटरनेट बंद किए जाने की स्थिति से निपटने के लिए बाकायदा ब्लूटूथ आधारित ऐप के इस्तेमाल का खाका तैयार किया गया था।
जांच एजेंसियों द्वारा खंगाले जा रहे डिजिटल सबूतों में कई भड़काऊ और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बातें सामने आई हैं।
शहादत का पैगाम: एक मैसेज में लिखा गया, "देखो यार, जो जान देने तक को तैयार हैं वो ये सुन लो कि कम से कम तुम्हारा अहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर…"
मौत से दबाव बनाने की रणनीति: एक अन्य बातचीत में सीधे तौर पर उकसाते हुए कहा गया, "भाई अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पे ज्यादा प्रेशर आएगा।"
सरकार गिराने का दावा: चैट्स में अगले ही दिन सरकार का आखिरी दिन होने जैसी बातें भी कही गईं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या यह महज कुछ लोगों की व्यक्तिगत राय थी या फिर भीड़ को हिंसक बनाने के लिए फैलाया जा रहा कोई संगठित प्रोपेगैंडा था।
प्रदर्शनों के दौरान जब नेटवर्क जैमर लगाए जाते हैं या मोबाइल इंटरनेट निलंबित किया जाता है, तो अक्सर भीड़ बिखर जाती है। लेकिन CJP के समर्थकों को पहले ही सचेत कर दिया गया था। लीक चैट्स में निर्देश दिए गए थे:
"प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद आपको नेटवर्क नहीं मिलेगा। पुलिस पिछली बार की तरह जैमर लगा सकती है। इसलिए अपने ग्रुप से जुड़े रहने के लिए पहले ही ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप डाउनलोड कर लें।"
जांच अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को ऐसे मैसेजिंग ऐप्स के लिंक भेजे गए थे जो बिना इंटरनेट के, केवल फोन के ब्लूटूथ सिग्नल (Mesh Networking) के जरिए आसपास के अन्य मोबाइलों से कनेक्ट होकर काम करते हैं।
हांगकांग आंदोलन से लेकर दुनिया भर में हुए बड़े जन-प्रदर्शनों में Bridgefy और Briar जैसे ब्लूटूथ मेश मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल देखा गया है। ये ऐप्स बिना किसी केंद्रीय सर्वर या मोबाइल टावर के, दो मोबाइलों के ब्लूटूथ रेंज (लगभग 100 मीटर) के जरिए मैसेज एक फोन से दूसरे फोन तक रिले करते हैं। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम अब यह जांच कर रही है कि इस प्रदर्शन में किस विशिष्ट ऐप का इस्तेमाल किया गया और क्या इसे तैयार करने में किसी तकनीकी विशेषज्ञ की मदद ली गई थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग और कनोट प्लेस पुलिस स्टेशनों में अब तक 4 FIR दर्ज कर ली हैं, जबकि 2 अन्य FIR दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
कानूनी कार्रवाई: इन प्राथमिकियों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं, शस्त्र अधिनियम (Arms Act) और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
डिजिटल फोरेंसिक: मोबाइल वीडियो, ड्रोन फुटेज, CCTV कैमरों और सोशल मीडिया पोस्ट्स की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। साइबर विशेषज्ञ हर लीक मैसेज के ओरिजिन और उसकी प्रामाणिकता की तकनीकी जांच कर रहे हैं।
फिलहाल, हिंसा के बाद राजधानी के प्रमुख सरकारी भवनों, चौराहे और संवेदनशील इलाकों में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सबूतों के सत्यापन के बाद इसमें शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
21 Jul 2026 04:44 pm
Published on:
21 Jul 2026 04:26 pm
