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बकाया वेतन और रीइंबर्समेंट के लिए बार-बार…दिल्ली में यूनिवर्सिटी की महिला लेक्चरर ने सुनाई उत्पीड़न की दास्तां, कोर्ट ने दर्ज कराई FIR

DSEU: दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) की महिला लेक्चरर ने बकाया सैलरी भुगतान और रीइंबर्समेंट के नाम पर बार-बार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दूसरी ओर यूनिवर्सिटी के वीसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
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नई दिल्ली

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Vishnu Bajpai

•

Updated: 20 Jan 2026, 3:36 PM IST

DSEU Woman lecturer sexual harassment FIR charge against officials

प्रतीकात्मक फोटो

DSEU: राष्ट्रीय राजधानी में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस हाईप्रोफाइल मामले में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। यह मामला दिल्ली की रेखा सरकार के स्वामित्व वाली दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) से जुड़ा है, जहां एक महिला लेक्चरर ने बकाया वेतन भुगतान और रीइंबर्समेंट के नाम पर बार-बार उत्पीड़न का शिकार होने का आरोप लगाया है। महिला लेक्चरर के इन आरोपों से जहां यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मचा है, वहीं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कोर्ट में रिव्यू याचिका और मानहानि का दावा करने की बात कही है।

पहले विस्तार से जानिए पूरा मामला क्या है?

दरअसल, सोमवार को द्वारका (साउथ) थाने में दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) की एक महिला लेक्चरर ने बकाया वेतन भुगतान और रीइंबर्समेंट के नाम पर यौन उत्पीड़न का शिकार होने की FIR दर्ज कराई। यह मुकदमा द्वारका कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। महिला लेक्चरर ने अपनी शिकायत में उसके सर्विस रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाने, बकाया वेतन भुगतान और रीइंबर्समेंट के नाम पर यौन और प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि जबसे यूनिवर्सिटी ने सैलरी बांटने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली, तबसे उसके पेमेंट में बार-बार देरी की गई। इससे उसे आर्थिक रूप से झटका लगा और लोन नहीं चुका पाने की वजह से उसपर पेनल्टी लग गई।

दिल्ली की द्वारका कोर्ट में महिला ने लगाई गुहार

दिल्ली की द्वारका कोर्ट में महिला लेक्चरर ने बताया कि वह पिछले 20 सालों से यूनिवर्सिटी में कार्यरत है। इसके बावजूद अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच बकाया वेतन और रीइंबर्समेंट भुगतान के लिए उसे बार-बार उत्पीड़न झेलना पड़ा। महिला लेक्चरर ने कोर्ट में आरोप लगाते हुए कहा कि उसने फरवरी 2024 में पुलिस से संपर्क कर मामले में कार्रवाई की मांग की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं की गई। इसके बाद अप्रैल 2024 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे सस्पेंड कर दिया। यह कार्रवाई उसे चुप कराने के लिए बदले की भावना से की गई।

बिना दोष के सस्पेंशन फिर बहाली के बाद धमकी

पीड़िता ने कोर्ट में आगे बताया कि सस्पेंशन के खिलाफ आंतरिक जांच की गई, जिसमें उसे निर्दोष पाया गया और सस्पेंशन रद किया गया। पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि इसमें सबसे बड़ा मुद्दा उसकी पर्सनल फाइल और नौकरी रिकॉर्ड की स्थिति से संबंधित है, जो वेतन, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए महत्वपूर्ण है। पीड़िता लेक्चरर ने कोर्ट को बताया कि जब वह अपने डॉक्यूमेंट्स लेने यूनिवर्सिटी गई तो वहां डॉक्यूमेंट्स फटे और क्षतिग्रस्त हाल में मिले। यह देख उसने पुलिस बुलाई। इस दौरान यूनिवर्सिटी के सीनियर्स ने पीड़िता पर खराब रिकॉर्ड्स को स्वीकार करने का दबाव डाला। इस दौरान उसे चेतावनी दी गई कि अगर शिकायतें लगातार जारी रहीं तो उसे इस्तीफा देना पड़ेगा।

अधिकारियों पर साजिश और धमकी देने का आरोप

पीड़िता ने DSEU के सीनियर अधिकारियों पर साजिश, धमकी और सरकारी संपत्ति को जान-बूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ ही कोर्ट में कहा कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई तो उसके सर्विस रिकॉर्ड को नुकसान और वर्तमान रोजगार को प्रभावित किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए सात जनवरी को FIR दर्ज करने के आदेश जारी किए। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर 19 जनवरी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 509 यानी किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से शब्द, हावभाव, आवाज या कार्य करना और धारा 34 यानी सामान्य इरादे के तहत मुकदमा दर्ज किया।

DSEU के वाइस चांसलर ने क्या कहा?

इस मामले में दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) के वाइस चांसलर अशोक नागवत ने HT को बताया कि महिला लेक्चरर द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। विवि के वीसी अशोक नागवत का कहना है कि महिला ने यह शिकायत किसी मकसद के लिए की है। उन्होंने कहा "हमें पता है कि शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। यह हम पर दबाव बनाने की कोशिश है। हम जल्द ही रिव्यू याचिका दायर करेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो मानहानि का मामला भी दायर कर सकते हैं, क्योंकि आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।"

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