
हरियाणा का खतरनाक गैंगस्टर मैनपाल बादली गिरफ्तार।
Gangster Manpal Badli: हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने आखिरकार छह साल की लंबी जद्दोजहद और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से भारत के मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर मैनपाल बादली को दबोच लिया है। बुधवार को उसे कंबोडिया से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। इसके बाद आरोपी से हरियाणा पुलिस पूछताछ कर रही है। इस दौरान आरोपी ने कई खुलासे किए हैं। विदेश में छिपे खतरनाक गैंगस्टर की गिरफ्तारी को हरियाणा पुलिस के इतिहास की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक माना जा रहा है।
हिसार सेंट्रल जेल से फरार हुए खतरनाक गैंगस्टर मैनपाल बादली ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि देश से फरार होने के बाद उसने कंबोडिया में खुद को नई पहचान देकर 'सोनू कुमार' के रूप में स्थापित किया था। उसे कंबोडिया की एक महिला से प्यार हो गया। इसके बाद वह उस महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगा। लिव इन रिलेशनशिप में महिला ने उसके तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद वह सिएम रीप शहर में 'डिस्कोथान' नाम से डिस्को चलाने लगा। इसमें वह महिला भी सहयोग करती थी। उसे मैनपाल की असलियत के बारे में पता नहीं था। कंबोडिया में उसका कारोबार तेजी से फल-फूल रहा था और वह एक सामान्य और सफल व्यापारी का जीवन जी रहा था।
हरियाणा पुलिस के सूत्रों के अनुसार, साल 2018 में हत्या सहित कई संगीन अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा मैनपाल हिसार सेंट्रल जेल से छह हफ्ते की पैरोल पर बाहर आया। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद भी वह जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। पैरोल को लेकर झज्जर के तत्कालीन एसपी ने आपत्ति भी जताई थी, लेकिन नियमों के तहत उसे राहत मिल गई थी। इसी अवसर का फायदा उठाकर उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाया और 2019 में कोलकाता एयरपोर्ट से थाईलैंड के लिए उड़ान भर ली।
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक फरारी के दौरान मैनपाल करीब सवा करोड़ रुपये की नकदी अपने साथ ले गया। उसने थाईलैंड, इंडोनेशिया और मॉरीशस में ठिकाना बनाने की कोशिश की, लेकिन अंततः कंबोडिया को सुरक्षित स्थान मानकर वहां बस गया। अपनी नई पहचान और स्थानीय विवाह के कारण उसने खुद को वहां के समाज में गहराई से शामिल कर लिया। हरियाणा एसटीएफ के आईजी सतीश बालन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भागने से पहले मैनपाल बादली ने एजेंट की मदद से सोनू कुमार पुत्र रणवीर सिंह निवासी मकान नंबर 898, सेक्टर-18, सरहोल गुड़गांव के पते पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इसकी जानकारी पर जब गुड़गांव में पूछताछ की गई तो पता चला कि सोनू कुमार नाम का कोई आदमी वहां रहता ही नहीं था।
पिछले छह सालों में मैनपाल ने भारत स्थित अपने परिवार से पूरी तरह संबंध तोड़ लिए। न तो उसने माता-पिता से संपर्क साधा और न ही भाई-बहनों से कोई बातचीत की। उसका परिवार भी उसकी गतिविधियों और ठिकाने से पूरी तरह अनजान रहा। अपराध की दुनिया से दूर सामान्य जीवन जीने की आड़ में उसने लंबे समय तक जांच एजेंसियों को चकमा दिया। इतना ही नहीं, मैनपाल ने कंबोडिया की स्थानीय भाषा भी सीख ली थी। इसके बाद उसने कंबोडिया की नागरिकता पाने के लिए आवेदन भी किया था। हालांकि इससे पहले ही भारतीय पुलिस ने इंटरपोल की सहायता से उसे धर दबोचा।
इस साल 26 मार्च को सीबीआई ने कंबोडियाई अधिकारियों से मैनपाल की गिरफ्तारी का औपचारिक अनुरोध किया। 24 जुलाई को वहां की पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की। करीब डेढ़ महीने तक उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया। भारत सरकार के विदेश और गृह मंत्रालयों के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार कंबोडिया ने उसे भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया। हरियाणा पुलिस की विशेष टीम वहां गई और मंगलवार को उसे भारत ले आई।
एसटीएफ आईजी सतीश बालन के अनुसार, कुछ महीने पहले तकनीकी सर्विलांस और मानव खुफिया सूचनाओं के आधार पर मैनपाल की मौजूदगी का पता चला। इसके बाद इंटरपोल, कंबोडियाई पुलिस और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाया गया। कानूनी व कूटनीतिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही गिरफ्तारी संभव हो सकी।
फिलहाल मैनपाल एसटीएफ की हिरासत में है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों को संदेह है कि फरारी के दौरान भी वह अपने गैंग को विदेश से ही संचालित करता रहा। उससे उसके गुर्गों के ठिकानों, आपराधिक गतिविधियों और रंगदारी मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। एसटीएफ मानती है कि उसकी गिरफ्तारी से कई पुराने अनसुलझे मामलों की गुत्थियां सुलझ सकती हैं।
मैनपाल बादली मूल रूप से हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। शुरुआत में वह ट्रैक्टर रिपेयर का काम सीख रहा था, लेकिन साल 2000 में कथित विवाद के बाद उसने अपने चाचा की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह अपराध की दुनिया में उतर गया। धीरे-धीरे वह हरियाणा का सबसे खतरनाक गैंगस्टर बन गया। उसके खिलाफ हत्या, फिरौती, लूट और संगठित अपराध जैसे 22 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। तीन हत्या मामलों में उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। 2014 में भोंडसी जेल में रहते हुए भी उसने हत्या की वारदात को अंजाम दिया था।
आईजी एसटीएफ सतीश बालन ने कहा, “मैनपाल बादली को कंबोडिया से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है। उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा और सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। जनता से अपील है कि अपराधियों व भगोड़ों के बारे में जानकारी साझा करें, ताकि समाज से अपराध का खात्मा किया जा सके।” दूसरी ओर हरियाणा पुलिस सूत्रों की मानें तो हरियाणा पुलिस अब खतरनाक कैदियों को पैरोल देने के मुद्दे को सुलझाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि तमाम एजेंसियों के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर खतरनाक कैदियों को गिरफ्तार करते हैं। इसके बाद कोर्ट से पैरोल पाकर मैनपाल बादली जैसे अपराधी विदेश भाग जाते हैं। ऐसे में पुलिस हाईकोर्ट में पैरोल के नियमों में बदलाव का अनुरोध करेंगे।
Published on:
04 Sept 2025 11:16 am
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