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सिस्टर अभया मर्डर केसः केरल हाईकोर्ट ने दोषी पादरी और नन को दी जमानत

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को 21 वर्षीय सिस्टर अभया की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए एक कैथोलिक पादरी और एक नन को जमानत दे दी।

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सिस्टर अभया मर्डर केसः केरल हाईकोर्ट ने दोषी पादरी और नन को दी जमानत

सिस्टर अभया मर्डर केसः केरल हाईकोर्ट ने दोषी पादरी और नन को दी जमानत

केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने गुरुवार को कैथोलिक पादरी थॉमस कोट्टूर और नन सेफी को जमानत दे दी, जिन्हें सीबीआई अदालत द्वारा 21 वर्षीय सिस्टर अभया की हत्या का दोषी पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 27 मार्च 1992 को कोट्टायम में एक कॉन्वेंट में एक कुएं के अंदर सिस्टर अभया का शव मिला था। हाईकोर्ट ने दोषियों की याचिकाओं पर कार्रवाई करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने की मांग की। जस्टिस विनोद चंद्रन औरजस्टिस सी जयचंद्रन की पीठ ने याचिका को स्वीकार कर लिया है।

बता दें, CBI अदालत ने दिसंबर 2020 में दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। CBI अदालत ने कोट्टूर और सिस्टर सेफी को 1992 में सेंट पायस टेंथ कॉन्वेंट हॉस्टल, कोट्टायम में हुई सिस्टर अभया की हत्या के लिए सजा सुनाई थी।

CBI के विशेष जज के सानिलकुमार ने कोट्टूर और सेफी को हत्या का दोषी पाया था और केन्द्रीय जांच ब्यूरो के मामले को स्वीकार किया था कि सिस्टर अभया की अपराधियों द्वारा हत्या कर दी गई थी जब उन्होंने कॉन्वेंट के भीतर दोनों अंतरंग स्थिति में देख लिया था। अभया पर कुल्हाड़ी के हैंडल से हमला किया गया था क्योंकि वह तीनों आरोपियों से जुड़ी कुछ कथित अनैतिक गतिविधियों की गवाह थी।

वहीं इस मामले को स्थानीय पुलिस और केरल पुलिस की अपराध शाखा ने शुरू में आत्महत्या मानते हुए बंद कर दिया था। बाद में सार्वजनिक आक्रोश के कारण इस मामले को CBI को सौंप दिया गया था। केरल हाईकोर्ट ने CBI की कोच्चि यूनिट को 1 नवंबर 2008 को जांच का निर्देश दिया था।

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19 नवंबर 2008 तक, CBI ने फादर थॉमस कोट्टूर, सिस्टर सेफी और फादर जोस पूथ्रीकायिल को गिरफ्तार कर लिया। जुलाई 2009 में, सीबीआई ने फादर थॉमस कोट्टूर, सिस्टर सेफी और फादर जोस पूथ्रीकायिल के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने के आरोप में आरोपपत्र दायर किया था।

अब जस्टिस विनोद चंद्रन औरजस्टिस सी जयचंद्रन की पीठ ने फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी की सजा पर रोक लगा दी और दोनों को पांच-पांच लाख रुपये जमा करने को कहा गया है साथ ही अदालत की अनुमति के बिना राज्य छोड़ने से मना भी किया गया है।

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