
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा अनोखा मामला।
High Court: हरियाणा के कुरुक्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। इस मामले पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और डीजीपी से जवाब तलब किया है। यह मामला एनडीपीएस एक्ट में एक युवक की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिसकी शिकायत एक मरे हुए आदमी ने की। पीड़िता ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दर्ज शिकायत रद करने की मांग की है। इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार से पांच दिनों के अंदर जवाब तलब किया है। अब इस मामले की सुनवाई 18 नवंबर को होगी। इसके बाद यह मामला गंभीर कानूनी बहस का विषय बन गया है।
मामला कुरुक्षेत्र के थानेसर इलाके का है। 46 साल के पाला राम को 19 जून की सुबह पुलिस ने उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें सोते हुए ही उठा ले गई। इस दौरान उसे हिरासत में लेने का कारण भी नहीं बताया। इसके बाद पाला राम ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पालाराम के वकील अरुण गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह अवैध है।
याचिका के अनुसार, पाला राम NDPS एक्ट के दो मामलों में जमानत पर थे, जबकि दो पुराने मामलों में बरी हो चुके हैं। इसके अलावा तीन अन्य मामलों में उन्हें छोटी मात्रा में गांजा रखने के लिए सजा भी हो चुकी है। याचिका में कहा गया है कि उन्होंने कभी जमानत का दुरुपयोग नहीं किया और न ही कोई नया अपराध किया है। इसके बावजूद पुलिस उन्हें घर में सोते समय बिना कारण बताए उठा ले गई, इसलिए यह हिरासत कानूनी रूप से सही नहीं है।
इस मामले में जो सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है, वो ये कि पुलिस ने यह कार्रवाई एक ऐसे व्यक्ति की शिकायत पर की, जिसकी मौत चार महीने पहले हो चुकी थी। याचिका में पालाराम के वकील ने बताया कि पुलिस को राम सिंह नाम के व्यक्ति ने 6 फरवरी 2025 को पालाराम के नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने की शिकायत दी। लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार राम सिंह की मौत 8 नवंबर 2024 को हो चुकी थी और उनका अंतिम संस्कार मानव सेवा समिति कुरुक्षेत्र में हुआ था। पालाराम के वकील ने इस मामले को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा कि मृत व्यक्ति के नाम पर दर्ज शिकायत पर पुलिस ने याची को परेशान किया है। यह सीधे-सीधे पुलिस की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पाला राम की पत्नी ने 11 जुलाई को हिरासत को चुनौती देते हुए अर्जी दी थी, लेकिन इसे 28 जुलाई को बिना किसी ठोस कारण बताए खारिज कर दिया गया। आदेश में मृतक के नाम वाली शिकायत जैसे सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। इससे पहले दायर याचिका भी तकनीकी कारणों से वापस लेनी पड़ी थी ताकि मामला सही रूप में दोबारा उठाया जा सके।
याचिका में पुराने केस हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रीवेंटिव डिटेंशन तभी उचित है जब उसका सीधा संबंध सार्वजनिक सुरक्षा से हो और वह पुराने या अविश्वसनीय आरोपों पर आधारित न हो। याचिकाकर्ता का आरोप है कि PIT NDPS Act के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं और समय-सीमाओं का पालन नहीं किया गया और पूरा मामला दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुवार को नशीली दवाओं से जुड़े मामलों में आरोपी पाला राम की हिरासत पर सवाल उठाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह साफ कहा कि PIT NDPS Act, 1988 के तहत जारी हिरासत आदेश की पूरी टाइमलाइन और प्रक्रिया रिकॉर्ड सहित कोर्ट में पेश की जाए। इस मामले में गृह सचिव, हरियाणा DGP, कुरुक्षेत्र SP और कृष्णा गेट पुलिस स्टेशन के SHO को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने सभी से विस्तृत जवाब मांगा है।
पाला राम ने बताया है कि वे हृदय रोगी हैं और पिछले एक साल में दो बार हार्ट अटैक झेल चुके हैं। परिवार में तीन बेटे और एक बेटी हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी उन पर है। याचिका में उनके मेडिकल रिकॉर्ड भी लगाए गए हैं और कोर्ट से मांग की गई है कि फैसला आने तक उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए, हिरासत पर रोक लगाई जाए और उसे सशरीर कोर्ट में प्रस्तुत होने का अधिकार दिया जाए।
निवारक हिरासत (Preventive Detention) एक ऐसा कानूनी प्रावधान है, जिसमें किसी व्यक्ति को अपराध करने के बाद नहीं बल्कि अपराध की आशंका होने पर पहले ही हिरासत में लिया जाता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि वह व्यक्ति समाज या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा न बने। इस प्रक्रिया में पुलिस या प्रशासन को यह साबित करना होता है कि हिरासत का आधार ताजा, विश्वसनीय और ठोस जानकारी है।
Updated on:
14 Nov 2025 05:19 pm
Published on:
14 Nov 2025 05:15 pm
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