याचिकाकर्ता ने अपने वकील के जरिए कोर्ट में बताया, "मुस्लिम कानून में प्यूबर्टी और बालिग होना एक समान है. और ये भी माना जाता है कि मुस्लिम लड़का और लड़की 15 साल की उम्र में बालिग हो जाते हैं।" उन्होंने आगे कहा, वे दोनों बालिग हो चुके हैं और उन्होंने अपनी पसंद से शादी कर ली है। इसलिए उन्हें स्वतंत्र होकर जीने का हक है। घरवालों का उनपर कोई अधिकार नहीं है।