
CJP राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। फोटो सोर्स-ANI
Delhi Police Action: NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अब और तेज हो गया है। सोमवार को मार्च के दौरान हंगामे के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। आंदोलन के बीच दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए मार्च में RAF जवान पर हमले के मामले में 9 FIR दर्ज की हैं। हालांकि इसके बाद भी प्रदर्शन जारी है और सुबह से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जाएगा कि इस घटनाक्रम के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक फिर जंतर-मंतर पहुंचे। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने दोबारा मंच तैयार कर अपना विरोध शुरू कर दिया। उनकी मुख्य मांग NEET विवाद की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।
इस बीच CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह आंदोलन आजादी के बाद देश के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि 20 तारीख को हुआ घटनाक्रम सिर्फ एक शुरुआत थी। अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में युवा दिल्ली पहुंचेंगे और अपनी आवाज उठाएंगे।
रांका ने आरोप लगाया कि 20 तारीख को मार्च के दौरान हालात उस समय बिगड़े जब पुलिस ने छात्रों पर सख्ती की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर पिछले 31 दिनों से युवा शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हैं और उनका आंदोलन गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित है।
CJP प्रवक्ता ने यह भी कहा कि उनकी मांग साफ है कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होगी, आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
सोमवार के मार्च के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण हो गए थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पथराव किया और सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए। इसी मामले में आरएएफ जवानों पर हमले के वीडियो सामने आने के बाद भी कार्रवाई की गई है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हुए।
घायलों में छात्र और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं। अस्पतालों में कई लोगों का इलाज चल रहा है। कुछ छात्रों को सिर, हाथ-पैर और आंखों में चोट आई है, जबकि कुछ मामलों में फ्रैक्चर और टांके लगाने की स्थिति भी बनी। पुलिसकर्मियों को भी चोट लगने की जानकारी सामने आई है।
इस बीच करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP, आम आदमी पार्टी और अन्य संगठनों ने छात्रों को कानूनी मदद देने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में कई राज्यों में प्रदर्शन किए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने सरकार को घेरा, जबकि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को भी धरने के दौरान हिरासत में लिया गया।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ ने भी मंगलवार को विरोध मार्च निकाला। छात्रों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के इस्तीफे की मांग दोहराई।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और पुलिस जांच के साथ-साथ संसद में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Updated on:
22 Jul 2026 10:19 am
Published on:
22 Jul 2026 10:19 am
