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Haryana Hit-and-Run Case: पहले टक्कर मारी, फिर इलाज के बहाने 90 मिनट घुमाया, मरने पर सड़क किनारे फेंका शव

हरियाणा के पंचकूला जिले में हुई एक भयावह हिट-एंड-रन घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पिकअप चालक और उसके साथी ने सड़क दुर्घटना में घायल हुए 48 वर्षीय सुरक्षा गार्ड को अस्पताल ले जाने के बहाने मौत के मुंह में धकेल दिया।

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Haryana hit and run case

घायल गार्ड को अस्पताल की जगह 90 मिनट सड़कों पर घुमाया, दम तोड़ने पर सड़क किनारे फेंका (Photo: X/AI)

हरियाणा के पंचकूला जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। पिंजौर में सड़क हादसे के बाद पिकअप सवारों ने घायल सिक्योरिटी गार्ड को अस्पताल पहुंचाने के बहाने गाड़ी में बिठाया, लेकिन इलाज कराने के बजाय वे करीब डेढ़ घंटे तक उसे सड़क पर लेकर इधर-उधर घूमते रहे। जब घायल ने दम तोड़ दिया, तो आरोपियों ने उसकी लाश को तिरपाल में लपेटकर सड़क किनारे फेंक दिया और फरार हो गए।

मृतक की पहचान चरणजीत सिंह के रूप में हुई है। सिंह दो बच्चों के पिता थे और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। इस हैरान करने वाली घटना के बाद से इलाके के ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश है।

सड़क पार करते समय हुआ था हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 1 बजे चरणजीत सिंह सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान पिंजौर की ओर से आ रहे एक पिकअप ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

घटना के बाद वाहन में सवार दो लोगों ने घायल चरणजीत सिंह को उठाकर अपने पिकअप वाहन में बैठा लिया। मौके पर मौजूद लोगों को दोनों ने बताया कि वे सिंह को अस्पताल लेकर जा रहे हैं। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सभी को झकझोर दिया है।

90 मिनट तक घूमते रहे आरोपी

परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने घायल को किसी अस्पताल में भर्ती नहीं कराया। इसके बजाय वे लगभग 90 मिनट तक वाहन लेकर घूमते रहे। इस दौरान गंभीर रूप से घायल चरणजीत सिंह ने दम तोड़ दिया।

आरोप है कि मौत के बाद आरोपियों ने शव को तिरपाल में लपेटा और सड़क किनारे स्थित एक पावर हाउस के पास फेंक दिया। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए।

फोन बजता रहा, परिवार अस्पतालों में तलाशता रहा

दूसरी ओर, चरणजीत सिंह के परिवार को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। परिजन उन्हें तलाशने के लिए पिंजौर, कालका और पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित कई अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।

परिवार लगातार उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश करता रहा। शुरुआत में फोन की घंटी बजती रही, लेकिन बाद में फोन बंद हो गया। इससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई।

शव मिलने से खुला मामला, CCTV फुटेज से खुली पोल

इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे तिरपाल में लिपटा एक शव देखा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

बाद में शव की पहचान होने के बाद परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग अमरावती पुलिस चौकी पहुंच गए और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे।

परिजनों ने अपने स्तर पर चंडीमंदिर टोल प्लाजा सहित कई जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें वह संदिग्ध पिकअप ट्रक दिखाई दिया। फिर परिवार ने गाड़ी का नंबर ट्रैक कर पुलिस को सौंप दिया। उसके आधार पर जांच आगे चल रही है।

'जान बचाने के बजाय सबूत मिटाया'

परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। आरोपियों ने मदद करने के बजाय घटना को छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश की। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। फ़िलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।