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ट्रेनों की बढ़ती भीड़ का रेलवे ने खोजा रास्ता, 11 हजार किमी के 7 रूट होंगे चार लाइन वाले

रेलवे के कुल नेटवर्क का महज 16 फीसदी हिस्सा होने के बावजूद इन रूट पर कुल रेल ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी चलता है। कुछ चुनिंदा कॉरिडोर पर यात्री और माल यातायात का असाधारण दबाव है। ऐसे में इन मार्गों पर नई रेल लाइनें जोड़कर क्षमता बढ़ाना रेलवे की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।
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नई दिल्ली

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Shadab Ahmed khan

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Updated: 27 Aug 2026, 11:25 AM IST

Rail Minister

नई दिल्ली। देश में ट्रेनों की बढ़ती संख्या और यात्री-माल यातायात के दबाव के बीच भारतीय रेलवे अब उन सात रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रहा है, जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी रेल रूट को चार लाइन वाला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि रेलवे के कुल नेटवर्क का महज 16 फीसदी हिस्सा होने के बावजूद इन रूट पर कुल रेल ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी चलता है। कुछ चुनिंदा कॉरिडोर पर यात्री और माल यातायात का असाधारण दबाव है। ऐसे में इन मार्गों पर नई रेल लाइनें जोड़कर क्षमता बढ़ाना रेलवे की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। गौरतलब है कि यह रूट देश के प्रमुख महानगरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ते हैं। इसलिए इन पर क्षमता बढ़ने का असर केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माल ढुलाई की गति और लागत पर भी पड़ेगा। फिलहाल इस महायोजना में शामिल दिल्ली-प्रयागराज रूट, वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर, हावड़ा-बिलासपुर सेक्शन और चेन्नई के पास की मुख्य लाइनों पर पहले से 4-लेन क्षमता उपलब्ध है। जबकि कुछ जगहों पर काम चल रहा है। वही शेष लाइनों के लिए डीपीआर बन चुकी है।

देश के सबसे अहम रेल कॉरिडोर

  1. दिल्ली-हावड़ा
  2. हावड़ा-चेन्नई
  3. चेन्नई-मुंबई
  4. मुंबई-दिल्ली
  5. दिल्ली-चेन्नई
  6. मुंबई-हावड़ा
  7. दिल्ली-गुवाहाटी

एक साथ चलेंगी ज्यादा ट्रेन

चार लाइन वाला नेटवर्क बनने से एक साथ ज्यादा ट्रेनों को चलाने की गुंजाइश बढ़ेगी। व्यस्त सेक्शन पर ट्रेनों को क्रॉसिंग या दूसरी ट्रेन के निकलने के लिए रोकने की जरूरत कम हो सकती है और यात्री तथा मालगाड़ियों के संचालन को अलग-अलग स्लॉट में व्यवस्थित करना आसान होगा।

यात्री ट्रेन और मालगाड़ी दोनों का दबाव

हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर रेलवे को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ यात्रियों की बढ़ती मांग के चलते अधिक ट्रेनें चलाने की जरूरत है, दूसरी ओर माल ढुलाई को सड़क से रेल की ओर लाने के लिए मालगाड़ियों के लिए भी पर्याप्त ट्रैक क्षमता जरूरी है। ऐसे में नई लाइनें रेलवे को सिर्फ ट्रेनें बढ़ाने का विकल्प नहीं देंगी, बल्कि मौजूदा सेवाओं को अधिक नियमित और भरोसेमंद बनाने की गुंजाइश भी पैदा करेंगी।

परिवहन लागत और ईंधन खपत कम होगी

रेल मंत्री वैष्णव ने रेल परिवहन के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर भी जोर दिया है। उन्होंने बताया कि रेलवे की क्षमता बढ़ने और माल ढुलाई का अधिक हिस्सा रेल की ओर आने से परिवहन लागत और ईंधन खपत कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही सड़क परिवहन पर दबाव घटाने की संभावना भी बनेगी। इस लिहाज से सात हाई-डेंसिटी रूट की चार-लाइनिंग सिर्फ ट्रैक बढ़ाने की परियोजना नहीं है। यह उन कॉरिडोर पर पहले से मौजूद दबाव को कम करने और आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यात्री व माल यातायात के लिए रेलवे को तैयार करने की रणनीति है।