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Red Fort Blast: विस्फोट में इस्तेमाल कार बेचने वाला डीलर गिरफ्तार, कुछ दिन पहले ही कराया था सौदा

Red Fort Blast: फिलहाल पुलिस डीलर अमित और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि धमाके की साजिश कहां रची गई थी और इसमें किस-किस की भूमिका रही।

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Red Fort Blast Delhi Police Special Cell Faridabad car dealer detained

लाल किला विस्फोट में इस्तेमाल कार का डीलर गिरफ्तार।

Red Fort Blast: लाल किला के पास हुए भीषण कार विस्फोट मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच में एक और अहम मोड़ पर पहुंचते हुए फरीदाबाद के एक कार डीलर को हिरासत में लिया है। यह वही कार डीलर है जिसने उस हुंडई i20 कार की बिक्री में मदद की थी, जिसका इस्तेमाल सोमवार को हुए विस्फोट में किया गया था। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल सेल ने फरीदाबाद पुलिस की मदद से सेक्टर-37 स्थित 'रॉयल कार प्लाजा' के मालिक अमित को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि अमित ने कुछ दिन पहले ही उस हुंडई i20 की बिक्री का सौदा करवाया था, जो बाद में धमाके में इस्तेमाल हुई। फिलहाल उसे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।

विस्फोट के बाद ताबड़तोड़ जांच शुरू

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह कार आखिर कैसे और किसके जरिए संदिग्ध व्यक्ति डॉ. उमर नबी के पास पहुंची। बताया जा रहा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के सहायक प्रोफेसर डॉ. उमर नबी उस समय कार चला रहे थे, जब उसमें विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और आसपास खड़ी कई अन्य गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कार को हाल ही में सेकेंड हैंड मार्केट के जरिए बेचा गया था। पुलिस अब डीलरशिप के पूरे रिकॉर्ड, बिक्री रसीद, बैंक लेनदेन और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गाड़ी का मालिकाना हक किन-किन लोगों के पास से होते हुए अंततः उमर नबी तक पहुंचा।

कार की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं कई नाम

स्पेशल सेल के अधिकारियों ने इंडियन एक्सप्रसे को बताया कि कुछ बिचौलियों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कार की खरीद-बिक्री में भूमिका निभाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस इन सभी की पहचान और लोकेशन ट्रेस कर रही है। अमित से यह भी पूछा जा रहा है कि उसने गाड़ी की डीलिंग के दौरान किस व्यक्ति से संपर्क किया था और क्या उसे खरीदार या उसके परिचितों पर किसी संदिग्ध गतिविधि का अंदेशा हुआ था। पुलिस को संदेह है कि कार में रखा गया विस्फोटक टाइमर या रिमोट ट्रिगर मैकेनिज़्म से संचालित हो सकता है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कार के अवशेष, विस्फोटक सामग्री के नमूने और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड के टुकड़े जब्त कर लिए हैं, जिन्हें अब एनआईए की लैब में जांच के लिए भेजा गया है।

फरीदाबाद पुलिस ने बढ़ाई निगरानी

वहीं, फरीदाबाद पुलिस ने भी अपने स्तर पर इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर नबी का निवास फरीदाबाद के धौज इलाके में है, जहां से पिछले दिनों पुलिस ने कुछ संदिग्ध वस्तुएं और दस्तावेज़ भी बरामद किए थे। इस सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ जारी है, जबकि उमर नबी का परिवार फिलहाल लापता बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला किसी संगठित साजिश का हिस्सा हो सकता है और इसमें स्थानीय नेटवर्क की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि जांच के हर पहलू को तकनीकी और मानवीय खुफिया इनपुट के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 200 जगह मारे छापे

उधर, दिल्ली में ब्लास्ट के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस भी एक्टिव हो गई है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को चार जिलों में बड़े पैमाने पर छापे मारे। इस दौरान अकेले कुलगाम में 200 से ज्यादा स्थानों पर छापे मारे गए और कुलगाम में JeI और अन्य प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 500 लोगों से पूछताछ की गई। इसमें कुछ संदिग्ध मिले हैं, जिन्हें जिला जेल मट्टन अनंतनाग भेज दिया गया। पुलिस ने दावा किया है कि इस दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है, जिसमें दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और मुद्रित सामग्री शामिल है, जिनका सीधा संबंध प्रतिबंधित संगठन से है। ये छापे फरीदाबाद, सहारनपुर, और लाल किला विस्फोट से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ की पृष्ठभूमि में मारे गए हैं, हालांकि अधिकारियों ने मौजूदा छापों और इन मामलों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं बताया है।