
संजय राउत। फाइल फोटो- पत्रिका
Sanjay Raut मुंबई। शिव सेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पेपर लीक मामले को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे विद्यार्थियों को दिल्ली पुलिस के रोके जाने पर तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार का यह रवैया अलोकतांत्रिक है। बता दें कि मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party) के हजारों समर्थकों ने नीट पेपर लीक पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च किया था।
केंद्र पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप लगाते हुए राउत ने दावा किया कि सरकार डर के मारे काम कर रही है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि प्रमुख संवैधानिक संस्थाएं सत्ताधारी शासन की 'गुलाम' बन चुकी हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए अपने संदेश में राउत ने छात्रों के बढ़ते आंदोलन पर सरकार के रुख का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं से डरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की ओर मार्च कर रहे विद्यार्थियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज जैसे कदम उठाए गए, लेकिन इसके बावजूद छात्रों का आंदोलन दबाया नहीं जा सका।
राउत ने कहा कि यह आंदोलन युवाओं के बढ़ते असंतोष का संकेत है और सरकार को दमन के बजाय विद्यार्थियों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने लिखा कि साफ शब्दों में कहें तो '56 इंच का सीना' कांप रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि एक वास्तविक लोकतांत्रिक सरकार प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को संसद की ओर मार्च की अनुमति न देने और पुलिसिया पाबंदियां लगाने के बजाए उनसे बातचीत करती।
राउत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर संसद की तरफ जा रहे मार्च को रोका जाता है, तो शायद इसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुख्यालय ले जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी जैसी एजेंसियां और यहां तक कि संवैधानिक संस्थाएं भी मोदी-शाह के नेतृत्व के प्रभाव में काम कर रहे हैं और उनके 'गुलाम' बन गए हैं।
नीट पेपर लीक को महज एक राजनीतिक मुद्दा न मानकर एक राष्ट्रीय संकट बताते हुए राउत ने कहा कि इस विवाद ने देश भर के लाखों विद्यार्थियों की उम्मीदों को तोड़ दिया है। उन्होंने इसे पूरी व्यवस्था की नाकामी बताते हुये केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और उन्हें इसके लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
राउत ने चेतावनी दी कि सरकार को लगा कि वह सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसे प्रदर्शनकारियों को आसानी से दबा सकती है, लेकिन अब यह आंदोलन पूरे देश में रफ्तार पकड़ चुका है। उन्होंने न्यायपालिका से भी आग्रह किया कि वह प्रदर्शनकारियों को केवल चिकित्सकीय सहायता देने के आदेश जारी करने से आगे बढ़े। इसके बजाय सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह विद्यार्थियों की चिंताओं और उनके भविष्य को लेकर उनके साथ एक सार्थक और पारदर्शी बातचीत करे।
Updated on:
20 Jul 2026 09:01 pm
Published on:
20 Jul 2026 08:48 pm
