
संसद में हंगामे पर सायोनी घोष का विपक्ष पर हमला, फोटो सोर्स- ANI
Parliament monsoon session deadlock: संसद के जारी मॉनसून सत्र के दौरान देश में हालही में हुई कई घटनाओं को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया है। वह चाहे सीजेपी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो, पुलिस के द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल या राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा हो। इन सभी मुद्दों की वजह से संसद की कार्यवाही में लगातार बाधा आ रही थी। अब सियासी हलचल के बीच टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुईं सांसद सायोनी घोष ने संसद ठप होने पर गहरी नाराजगी जताई है। वहीं, दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर बिना चर्चा के बिल पास कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़ एनडीए समर्थक एनसीपीआई गुट में शामिल हुईं सांसद सायोनी घोष ने संसद में लगातार हो रहे हंगामे की आलोचना की। उन्होंने कहा है कि हंगामे के कारण संसद का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और देश के करदाताओं (टैक्सपेयर्स) की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो रही है। क्वेश्चन आवर और जीरो आवर न चल पाने की वजह से हम अपने संसदीय क्षेत्र के जरूरी मुद्दे नहीं उठा पा रहे हैं। जनता ने हमें अपनी आवाज बुलंद करने के लिए चुना है, लेकिन यह गतिरोध दुखद है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि राजनीतिक विरोध सदन के बाहर होना चाहिए, जबकि संसद के भीतर नियमों के तहत कार्यवाही चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की साझी जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के पतन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। टीएमसी के 64 विधायकों के अलग गुट बनाने और 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय के बाद कभी बीजेपी पर हमलावर रहने वाली सायोनी घोष, यूसुफ पठान और काकोली घोष जैसे नेताओं ने नया रुख अपनाते हुए एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है।
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्र सरकार पर संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के अहम विधेयक पास कराने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा कि सरकार एफसीआरए जैसे सख्त और विवादित कानूनों को जल्दबाजी में बिना सार्थक बहस के पारित करा देती है। ओ'ब्रायन का कहना है कि संसद में लगातार गतिरोध रहने से सरकार की जवाबदेही कम होती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ-साथ विधेयकों की उचित जांच-परख भी प्रभावित होती है।
Updated on:
01 Aug 2026 06:03 pm
Published on:
01 Aug 2026 05:57 pm
