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गांधी की तरह देश घूमिये, फिर पता चलेगा…बोतलबंद पानी की PIL पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बोतलबंद पानी (Bottled Water) की गुणवत्ता पर दायर PIL सुनने से इनकार किया। CJI सूर्यकांत ने देश में पानी की किल्लत का हवाला देते हुए इसे 'अमीरों का फोबिया' करार दिया।

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PIL on plastic bottle water

बोतलबंद पानी पर PIL खारिज (Photo: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने बोतलबंद पानी (Packaged Drinking Water) की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को सुनने से साफ इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) की पीठ ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए इसे 'अमीरों का फोबिया' करार दिया।

देश में पीने की पानी की किल्लत- CJI

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की वकील अनीता शेनॉय (Anita Shenoy) से पूछा कि जिस देश में एक बड़ी आबादी को बुनियादी पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है, वहां बोतलबंद पानी के मानकों की बात करना कितना उचित है?

सीजेआई ने कहा, "मैडम, इस देश में पीने का पानी कहां है? लोगों के पास पीने के लिए साधारण पानी तक नहीं है, बोतलबंद पानी की गुणवत्ता तो बहुत बाद की बात है। यह सब 'अमीरों की मुकदमेबाजी' (Luxury Litigation) है।" उन्होंने कहा, ग्रामीण इलाकों में लोग ज़मीन का पानी पीते हैं, और उन्हें कुछ नहीं होता।

'गांधी जी की तरह देश घूमिए, तब दिखेगी असलियत'

अदालत ने याचिकाकर्ता सारंग वामन यदवादकर (Sarang Vaman Yadwadkar) को जमीनी हकीकत समझने की सलाह दी। बेंच ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा, "जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत आए, तो उन्होंने देश के लोगों की पीड़ा समझने के लिए पूरे भारत की यात्रा की। याचिकाकर्ता से कहिए कि वे देश के उन गरीब इलाकों में जाएं जहां लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब उन्हें समझ आएगा कि असल भारत क्या है।"

हालांकि वरिष्ठ वकील अनीता शेनॉय ने स्पष्ट किया कि यह मामला सामान्य पेयजल का नहीं, बल्कि विशेष रूप से बोतलबंद पानी (Bottled Water) का है। उन्होंने तर्क दिया कि चिंता का विषय वे तत्व हैं जो प्लास्टिक से निकलकर पानी में घुल जाते हैं। यह सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। लेकिन पीठ उनके इस तर्क से प्रभावित नहीं हुई।

क्यों दायर की गई थी याचिका?

याचिका में मांग की गई थी कि भारत में बोतलबंद पानी के मानकों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूरोपीय संघ के उच्च मानकों के बराबर लाया जाए। इसके पीछे तर्क दिया गया कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा का मामला है।

हालांकि देश की शीर्ष कोर्ट इसे 'शहरी केंद्रित’ सोच बताया। CJI ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी जमीन का पानी पीते हैं और उन्हें कुछ नहीं होता।

कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने PIL वापस ले ली। हालांकि, अदालत ने उन्हें अपनी शिकायतों के साथ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के पास जाने की छूट दी है।