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मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सोनम रघुवंशी से कहा- सरेंडर करो, नहीं तो जमानत होगी रद्द

Supreme Court Sonam Raghuvanshi: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी को स्पष्ट विकल्प दिया है कि वह मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने तक सरेंडर करे या फिर मेरिट पर जमानत रद्द करने का सामना करे। कोर्ट ने गिरफ्तारी दस्तावेजों में लिपिकीय त्रुटि (धारा 103 की जगह 403) के आधार पर मिली जमानत पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
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Supreme Court Sonam Raghuvanshi

मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, फोटो सोर्स- एक्स @barandbench

Raja Raghuvanshi murder case court update: देश को झकझोर देने वाले चर्चित मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को कड़ी चेतावनी जारी की है। शीर्ष अदालत ने सोनम को स्पष्ट दो विकल्प दिए हैं, या तो वह मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने तक आत्मसमर्पण करे या फिर अदालत उसकी जमानत रद्द करने पर मेरिट के आधार पर आदेश पारित करेगी।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मेघालय हाईकोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी की ज़मानत बरकरार रखने के फैसले को चुनौती दी गई थी। वहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से कहा कि 'आपके पास दो विकल्प हैं। या तो हम मेरिट पर सुनवाई कर आदेश पारित करेंगे, या फिर जब तक मुख्य अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक आप आत्मसमर्पण करें। गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद हम ज़मानत पर पुनर्विचार कर सकते हैं। दूसरा विकल्प आपके लिए बेहतर हो सकता है। अपने मुवक्किल से निर्देश लें और हमें सूचित करें।' अदालत ने सोनम रघुवंशी को अपना रुख तय करने के लिए गुरुवार, 23 जुलाई तक का समय दिया है।

सिर्फ टाइपिंग की गलती पर ज़मानत कैसे?

शीर्ष अदालत ने निचली अदालत द्वारा सोनम को ज़मानत दिए जाने के आधारों पर भी गंभीर सवाल उठाए। गौरतलब है कि शिलॉन्ग अदालत ने इस आधार पर ज़मानत दी थी कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों (अरेस्ट मेमो, केस डायरी आदि) में हत्या की धारा 103(1) (BNS) की जगह गलती से 403(1) (BNS) दर्ज हो गई थी, जिसे निचली अदालत ने एक गंभीर प्रक्रियात्मक खामी माना था।

इस पर मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि 'आरोपी सोनम को अपनी गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी। धारा 103 की जगह 403 लिखा जाना महज एक 'टाइपोग्राफिकल त्रुटि' (लिपिकीय गलती) थी। इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। आरोपी ने इस मुद्दे को बहुत बाद में उठाया, जो ज़मानत का आधार नहीं बन सकता।' सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर संदेह जताया कि क्या केवल दस्तावेजों में हुई लिपिकीय गलती के आधार पर इतने गंभीर अपराध में जमानत देना सही था।

क्या था मेघालय हनीमून मर्डर केस?

यह मामला मई 2025 का है, जब इंदौर के नवविवाहित दंपति राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे। नोंग्रियाट स्थित एक होमस्टे से चेक-आउट करने के बाद दोनों रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। कई दिनों तक चली तलाश के बाद 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव वेई सावडोंग झरने के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जबकि सोनम का कोई सुराग नहीं मिला। बाद में 8 जून 2025 को सोनम रघुवंशी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास एक ढाबे से ट्रैक किया गया। मामले की जांच के दौरान मेघालय पुलिस ने दावा किया कि यह सुनियोजित हत्या थी और जांच में सोनम रघुवंशी तथा उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा को इस साजिश का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई शुरू की।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर सोनम सरेंडर का विकल्प चुनती है, तो वह ट्रायल कोर्ट को सरकारी और मुख्य गवाहों की गवाही तेजी से पूरी करने का निर्देश देगी, जिसके बाद ज़मानत पर दोबारा विचार किया जा सकता है।