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छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CJP प्रवक्ता सौरव दास ने क्या कहा?

छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि जो राज्य सरकारें आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना चाहती हैं, वे इसके लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
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Cockroach Janta Party controversy

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास (Photo-IANS)

नई दिल्ली। छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि जो राज्य सरकारें आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना चाहती हैं, वे इसके लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और सुप्रीम कोर्ट का कोई भी आदेश इसमें बाधा नहीं बनेगा।

'समझौते के बावजूद दर्ज हो रही थीं एफआईआर'

सौरव दास ने कहा कि युवाओं के आंदोलन के बाद 25 जुलाई को सरकार के साथ समझौता हुआ था, जिसमें कुछ ठोस गारंटी दी गई थीं। समझौते की मुख्य शर्त यह थी कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मौजूदा मुकदमे वापस लिए जाएंगे और भविष्य में किसी भी छात्र पर दंडात्मक कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन दिया जाएगा।

उसके बाद भी कई बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों से छात्रों पर नई एफआईआर दर्ज करने, उन्हें हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।

सौरव दास ने कहा कि उनका संगठन पहले दिन से ही आंदोलनकारी छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा रहा है। समझौते से पहले भी हमने छात्रों को हरसंभव कानूनी और मेडिकल सहायता मुहैया कराई थी और आगे भी यह जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट की इस स्पष्टता के बाद अब राज्यों के पास मुकदमों को निरस्त करने का रास्ता साफ हो गया है।

प्रदर्शन पर जानें SC ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर आज (3 अगस्त) सुनवाई की और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें कानून के अनुसार छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बंद करने या वापस लेने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उसके 28 जुलाई के आदेश का यह मतलब नहीं है कि राज्य सरकारें एफआईआर वापस नहीं ले सकतीं।

कोर्ट का यह स्पष्टीकरण उस दलील के बाद आया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि 28 जुलाई का आदेश आंदोलन समाप्त कराने के दौरान केंद्र सरकार द्वारा सीजेपी नेताओं से किए गए एफआईआर वापस लेने के आश्वासन में बाधा बन सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने अपने पहले के आदेश में इस्तेमाल किए गए 'क्रिमिनल एंटेसेडेंट्स' शब्द की भी व्याख्या की। शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस शब्द का अर्थ केवल गंभीर और जघन्य अपराध से है।