
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों को दी बड़ी राहत, photo source@ANI
Student Protest Violence:सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों में 28 जुलाई को दिए गए अपने अंतरिम आदेश के दो बिंदुओं पर स्पष्टीकरण दिया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली (एनसीटी) और अन्य राज्यों की सरकारों को कानून के अनुसार आपराधिक मामलों को बंद करने या वापस लेने की स्वतंत्रता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके पिछले आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्द "आपराधिक इतिहास" (Criminal Antecedents) का आशय केवल गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोपियों से है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह स्पष्टीकरण उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें हाल के छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों का आरोप लगाया गया था। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने कहा, "दिल्ली (एनसीटी) या किसी भी अन्य राज्य को कानून के अनुसार ऐसे किसी भी आपराधिक मामले को बंद करने या वापस लेने की स्वतंत्रता होगी। पैराग्राफ 8(5) में इस्तेमाल किए गए 'आपराधिक इतिहास' शब्द का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है।"
अपने 28 जुलाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए उन लोगों को रिहा करने का निर्देश दिया था, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वहीं, आपराधिक इतिहास वाले लोगों को इस आदेश के दायरे से बाहर रखा गया था।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह पुलिस की कथित ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था बनाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संस्था को एसआईटी (SIT) नहीं कहा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी लोगों को एक ही श्रेणी (Catch-all Category) में रखना गिरफ्तारी का आधार बन सकता है। कोर्ट के समक्ष यह भी कहा गया कि राज्य सरकारों द्वारा इस पर कार्रवाई करने के बाद मामले को रद्द कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की तुलना आदतन अपराधियों से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि जो लोग आदतन अपराधी नहीं हैं, उनके खिलाफ कोई अनुचित कार्रवाई नहीं की जाएगी। तुषार मेहता ने कहा, "जो लोग कानून के दायरे में रहकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें उन लोगों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। ऐसे मामलों पर अलग से विचार किया जा सकता है।" हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों या आपराधिक कार्यवाही को बंद करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके लिए अधिकारियों को एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करनी होगी।
याचिकाकर्ताओं में से एक ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में हम केंद्र सरकार से हलफनामा चाहते हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि इनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और किन हालात में इससे बचा जाना चाहिए।" कोर्ट ने केंद्र सरकार को एफआईआर और पैलेट गन के इस्तेमाल से संबंधित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
Updated on:
03 Aug 2026 03:27 pm
Published on:
03 Aug 2026 02:56 pm
